संसद में गुरुवार को तीन दिवसीय विशेष सत्र के दौरान परिसीमन, जनगणना और महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर जोरदार बहस देखने को मिली। विपक्ष ने परिसीमन विधेयक को “असंवैधानिक” बताते हुए इसका विरोध किया, जबकि महिला आरक्षण का समर्थन किया।
समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने सदन में कहा कि उनकी पार्टी तीनों विधेयकों का विरोध कर रही है क्योंकि परिसीमन को जनगणना से अलग किया जा रहा है। उन्होंने यह भी मांग की कि महिला आरक्षण कानून में पिछड़े वर्गों और मुस्लिम महिलाओं को शामिल किया जाए।
इसके समर्थन में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि वे महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि जनगणना क्यों नहीं कराई जा रही है। इस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब देते हुए कहा कि जनगणना 2027 की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और सरकार जातिगत जनगणना भी करा रही है।
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अमित शाह ने सदन में स्पष्ट कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना “असंवैधानिक” है। उन्होंने कहा, “हमारा संविधान धर्म आधारित आरक्षण की अनुमति नहीं देता। मुस्लिमों को धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता।”
उन्होंने आगे कहा कि सरकार जातिगत जनगणना कर रही है और यह प्रक्रिया पूरी तरह लागू होगी। शाह ने यह भी कहा कि “समाजवादी पार्टी चाहे तो अपने सभी टिकट मुस्लिम उम्मीदवारों को दे सकती है, लेकिन आरक्षण धर्म के आधार पर नहीं हो सकता।”
इस पर अखिलेश यादव ने पलटवार करते हुए कहा कि गृह मंत्री का बयान लोकतंत्र के खिलाफ है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मुस्लिम महिलाएं देश की आधी आबादी का हिस्सा नहीं हैं?
दोनों नेताओं के बीच बहस तेज हो गई, जिसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने हस्तक्षेप कर दोनों को अपनी बात रखने के लिए समय देने की बात कही।
सत्र में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने महिला आरक्षण कानून में संशोधन और परिसीमन आयोग के गठन से जुड़े विधेयक पेश किए, जिसका विपक्ष ने विरोध किया।
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