संसद ने बुधवार, 12 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के कामकाज और अधिकारों का दायरा बढ़ाने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी। राज्यसभा ने राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित कर दिया। इससे देश की सहकारी समितियों को सीधे ऋण और अनुदान उपलब्ध कराने का रास्ता साफ होगा।
यह विधेयक राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 में संशोधन से संबंधित है। लोकसभा ने इसे मंगलवार, 11 अगस्त को ही पारित कर दिया था। अब राज्यसभा की मंजूरी के बाद विधेयक को कानून का रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
सरकार का कहना है कि संशोधन का उद्देश्य देश में सहकारी क्षेत्र को मजबूत करना और सहकारी समितियों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है। इसके तहत एनसीडीसी का वित्तीय और कार्यक्षेत्र बढ़ाया जाएगा, जिससे सहकारी संस्थाओं को अपनी परियोजनाओं और गतिविधियों के लिए आवश्यक धन जुटाने में मदद मिलेगी।
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सहकारिता मंत्रालय के राज्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित संशोधन में सरकार की ओर से अतिरिक्त बजटीय वित्तीय सहायता देने का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि संशोधन केवल एनसीडीसी के अधिकार क्षेत्र और वित्तीय दायरे का विस्तार करता है।
सरकार के अनुसार, सहकारी समितियां कृषि, ग्रामीण विकास, डेयरी, मत्स्य पालन और अन्य क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। एनसीडीसी के माध्यम से इन संस्थाओं को वित्तीय सहायता मिलने से उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
विधेयक का उद्देश्य सहकारी समितियों तक वित्तीय संसाधनों की पहुंच आसान बनाना है। सरकार का मानना है कि इससे सहकारी क्षेत्र में निवेश, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
संसद से विधेयक पारित होने के बाद केंद्र सरकार अब इसके प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में आगे बढ़ेगी। माना जा रहा है कि संशोधित प्रावधान सहकारी संस्थाओं को अधिक वित्तीय स्वतंत्रता और विकास के नए अवसर उपलब्ध करा सकते हैं।
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