संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र आज से शुरू हो गया है, जिसमें महिला आरक्षण विधेयक और संविधान (131वां संशोधन) विधेयक सहित कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा होगी। इस सत्र में तीखी बहस की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि विपक्षी दलों ने सरकार के प्रस्तावों का विरोध करने का ऐलान किया है।
केंद्र सरकार संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 और परिसीमन विधेयक 2026 पेश करने की तैयारी में है। प्रस्ताव के अनुसार लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर अधिकतम 850 किया जाएगा, जिसमें 815 सीटें राज्यों के लिए और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए निर्धारित होंगी। इस कदम का उद्देश्य 2029 के आम चुनावों से पहले संसद में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना है।
हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर दक्षिणी राज्यों में विरोध तेज हो गया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने इसे “काला कानून” बताते हुए गुरुवार को परिसीमन बिल की प्रति जला दी। उन्होंने काले झंडे फहराकर विरोध प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार पर तमिलों के हितों की अनदेखी का आरोप लगाया।
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स्टालिन ने पहले ही 16 अप्रैल को राज्यव्यापी काले झंडा प्रदर्शन की घोषणा की थी, जिससे राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है।
वहीं, केंद्र सरकार ने कहा है कि किसी भी क्षेत्र के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा और सभी राज्यों में सीटों का विस्तार संतुलित तरीके से किया जाएगा।
इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लोकसभा में महिला आरक्षण संवैधानिक संशोधन विधेयक पर संबोधन देंगे। सरकार का लक्ष्य इस विधेयक को पारित कराना है, ताकि महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाई जा सके।
भाजपा की ओर से सांसद बांसुरी स्वराज और अभिनेत्री से नेता बनीं कंगना रनौत महिला आरक्षण के समर्थन में सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी में हैं।
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