संसद की शिक्षा संबंधी स्थायी समिति ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से कराने की आवश्यकता पर जोर दिया है। समिति ने कहा कि परीक्षा प्रणाली या सरकारी स्तर पर कोई भी चूक होने का सीधा नुकसान छात्रों को उठाना पड़ता है, इसलिए सुधार बेहद जरूरी है।
सोमवार को हुई बैठक में समिति ने स्पष्ट किया कि नीट परीक्षा में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी, तकनीकी खामियां या प्रशासनिक लापरवाही से छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है। इसलिए परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
समिति ने यह भी कहा कि जब भी परीक्षा प्रणाली में कोई विफलता होती है, उसका खामियाजा लाखों छात्रों को भुगतना पड़ता है, जो वर्षों की मेहनत के बाद इस परीक्षा में शामिल होते हैं।
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चर्चा के दौरान यह सुझाव दिया गया कि परीक्षा संचालन से जुड़े सभी चरणों में निगरानी बढ़ाई जाए और डिजिटल सिस्टम को और मजबूत बनाया जाए ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना को खत्म किया जा सके।
समिति ने यह भी माना कि नीट जैसे बड़े राष्ट्रीय स्तर के परीक्षा ढांचे में सुधार की लगातार जरूरत है, ताकि छात्रों का भरोसा बना रहे और वे निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा में भाग ले सकें।
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों ने छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ाई है, इसलिए एक मजबूत और पारदर्शी प्रणाली बनाना समय की मांग है।
समिति ने सरकार से यह सुनिश्चित करने को कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही की गुंजाइश न रहे और परीक्षा व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाया जाए।
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