कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान सरमा द्वारा दर्ज कराए गए मामले में बड़ा कानूनी झटका लगा है। गुवाहाटी हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। यह फैसला न्यायमूर्ति पार्थिवज्योति सैकिया ने सुनाया, जिन्होंने मंगलवार को सुनवाई के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी पवन खेड़ा को ट्रांजिट जमानत देने से इनकार करते हुए उन्हें असम की अदालत में जाने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि इस मामले में अब असम की अदालत ही सुनवाई करेगी और किसी अन्य हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप नहीं होगा।
यह मामला उस समय और गरमा गया जब पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री की पत्नी के पास कई पासपोर्ट हैं और वे विभिन्न देशों में व्यवसाय संचालित करती हैं। इन आरोपों के बाद असम पुलिस ने 6 अप्रैल को उनके खिलाफ मामला दर्ज किया था।
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बीजेपी ने इन आरोपों को “राजनीतिक रूप से प्रेरित” और “बेबुनियाद” बताते हुए कांग्रेस पर हमला बोला था। पार्टी प्रवक्ता ने दावा किया कि खेड़ा द्वारा पेश किए गए दस्तावेज फर्जी, एडिटेड और एआई-जनरेटेड थे।
पवन खेड़ा ने इस मामले में तेलंगाना हाईकोर्ट का रुख किया था और कहा था कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है। 10 अप्रैल को हाईकोर्ट ने उन्हें अग्रिम जमानत दे दी थी, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश पर रोक लगा दी।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि जब तक असम की सक्षम अदालत इस मामले में निर्णय नहीं लेती, तब तक कोई भी राहत उस अदालत के अधिकार क्षेत्र को प्रभावित नहीं करेगी।
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