उत्तर प्रदेश के पीलीभीत टाइगर रिजर्व में गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिली पांच वर्षीय बाघिन की उपचार के दौरान मौत हो गई। वन विभाग के अधिकारियों ने रविवार को इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि बाघिन का शव पोस्टमार्टम के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), बरेली भेज दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही उसकी मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक एवं प्रभागीय वनाधिकारी मनीष सिंह ने बताया कि बाघिन शनिवार रात उपचार के दौरान दम तोड़ गई। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि वह किसी अन्य बाघ के साथ क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर हुए संघर्ष में गंभीर रूप से घायल हुई थी।
वन अधिकारियों के अनुसार, शनिवार शाम करीब पांच बजे नियमित गश्त के दौरान माला रेंज में बाघिन अचेत अवस्था में एक पेड़ के नीचे पड़ी मिली। उसके एक कान के अंदरूनी हिस्से के पास गहरा घाव था, जिसमें कीड़े पड़ चुके थे। उसकी हालत बेहद गंभीर थी और वह स्वयं उठने की स्थिति में नहीं थी।
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घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग ने तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई। पशु चिकित्सक डॉ. दक्ष गंगवार के नेतृत्व में पांच सदस्यीय विशेषज्ञ टीम का गठन किया गया, जिसने बाघिन का उपचार शुरू किया। टीम ने उसकी जान बचाने के लिए लगातार प्रयास किए, लेकिन गंभीर चोटों और बिगड़ती स्थिति के कारण उसे बचाया नहीं जा सका।
वन विभाग ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि यह पुष्टि होती है कि बाघिन की मौत क्षेत्रीय संघर्ष के कारण हुई, तो यह वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार का हिस्सा माना जाएगा। हालांकि अधिकारी सभी पहलुओं की गहन जांच कर रहे हैं ताकि किसी अन्य संभावित कारण से भी इनकार किया जा सके।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व देश के प्रमुख बाघ संरक्षण क्षेत्रों में शामिल है, जहां बाघों की सुरक्षा, निगरानी और संरक्षण के लिए नियमित गश्त तथा वैज्ञानिक प्रबंधन की व्यवस्था की जाती है। वन विभाग ने कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए निगरानी और मजबूत की जाएगी।
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