देश के करोड़ों किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना को अगले पांच वर्षों के लिए जारी रखने का फैसला किया है। शुक्रवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस योजना को वित्त वर्ष 2030-31 तक बढ़ाने की मंजूरी दी गई। इसके लिए कुल 3,15,614 करोड़ रुपये के खर्च का प्रावधान किया गया है।
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि पीएम-किसान योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रहेगी। सरकार का उद्देश्य किसानों को पहले की तरह आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत 24 फरवरी 2019 को की गई थी। यह केंद्र प्रायोजित योजना देशभर के किसानों को निश्चित आय सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई थी।
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इस योजना के तहत पात्र किसान परिवारों को हर साल 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह राशि किसानों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से तीन बराबर किस्तों में भेजी जाती है। प्रत्येक किस्त में किसानों को 2,000 रुपये मिलते हैं। किस्तों का समय कृषि चक्र को ध्यान में रखकर तय किया जाता है, ताकि बुवाई और फसल की तैयारी के दौरान किसानों को आर्थिक मदद मिल सके।
सरकार के अनुसार, योजना की किस्तें ऐसे समय जारी की जाती हैं जब किसानों को बीज, खाद, कीटनाशक और अन्य कृषि सामग्री खरीदने के लिए धन की सबसे अधिक जरूरत होती है। इससे किसानों पर आर्थिक दबाव कम होता है और उन्हें ऊंची ब्याज दरों पर कर्ज लेने की आवश्यकता घटती है।
सरकार का कहना है कि इस योजना का सबसे अधिक लाभ छोटे और सीमांत किसानों को मिला है। अब तक पीएम-किसान योजना की 23 किस्तों के जरिए किसानों के खातों में 4.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे भेजी जा चुकी है।
नीति आयोग के आकलन के अनुसार, पीएम-किसान योजना ने कई किसानों की आय बढ़ाने में मदद की है और अनौपचारिक कर्ज पर उनकी निर्भरता कम की है।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पीएम-किसान योजना की 23वीं किस्त जारी की थी। कार्यक्रम का आयोजन भारत सरकार के कृषि मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल सरकार के सहयोग से किया था।
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