नरेंद्र मोदी ने असम में पूर्वोत्तर भारत की पहली आपातकालीन लैंडिंग सुविधा (ELF) पर ऐतिहासिक लैंडिंग कर एक महत्वपूर्ण रणनीतिक संदेश दिया। प्रधानमंत्री मोरान, असम में C-130J सुपर हरक्यूलिस विमान से पहुंचे और कई बड़े विकास एवं रणनीतिक परियोजनाओं का निरीक्षण किया।
असम के डिब्रूगढ़ जिले के मोरान बाईपास पर बनी इस आपातकालीन लैंडिंग सुविधा को भारतीय वायु सेना के सहयोग से विकसित किया गया है। यह सुविधा आपातकाल के दौरान सैन्य और नागरिक दोनों प्रकार के विमानों के उतरने और उड़ान भरने में सक्षम है। प्रधानमंत्री के आगमन के बाद यहां सुखोई Su-30MKI और राफेल लड़ाकू विमानों ने टच-एंड-गो अभ्यास कर हवाई प्रदर्शन किया।
पूर्वोत्तर क्षेत्र चीन, बांग्लादेश और म्यांमार जैसे देशों से अंतरराष्ट्रीय सीमाएं साझा करता है, इसलिए यह सुविधा रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह रनवे 40 टन तक के लड़ाकू विमान और 74 टन तक के परिवहन विमानों को संभाल सकता है, जिससे प्राकृतिक आपदाओं और आपात स्थितियों में तेजी से राहत एवं बचाव कार्य संभव होंगे।
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इसके बाद प्रधानमंत्री ने ब्रह्मपुत्र नदी पर बने कुमार भास्कर वर्मा सेतु का निरीक्षण किया। करीब 3,030 करोड़ रुपये की लागत से बने इस छह लेन पुल से गुवाहाटी और नॉर्थ गुवाहाटी के बीच यात्रा समय घटकर लगभग 7 मिनट रह जाएगा। यह पुल भूकंप सुरक्षा तकनीक और आधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम से लैस है।
प्रधानमंत्री ने गुवाहाटी में 5,450 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया। इनमें कामरूप जिले के अमिंगांव में राष्ट्रीय डेटा सेंटर की शुरुआत शामिल है, जो डिजिटल सेवाओं को मजबूत करेगा। साथ ही भारतीय प्रबंधन संस्थान, गुवाहाटी के नए परिसर का उद्घाटन किया गया, जिससे पूर्वोत्तर में उच्च शिक्षा और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
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