प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को उनकी भारत यात्रा के दौरान प्राचीन तमिल साहित्य की प्रसिद्ध कृति ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी भाषा में अनुवादित संस्करण भेंट किया। यह पुस्तक केंद्रीय शास्त्रीय तमिल संस्थान (सीआईसीटी) द्वारा प्रकाशित की गई है और इसका रूसी अनुवाद नैरा मक्र्तच्यान ने किया है।
यह उपहार भारत और रूस के बीच राजनीतिक एवं रणनीतिक संबंधों के साथ सांस्कृतिक जुड़ाव को भी दर्शाता है। पुतिन 12-13 सितंबर को होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे हैं। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन के बीच द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा भी हो रही है।
क्या है तिरुक्कुरल?
तिरुक्कुरल को ‘कुरल’ के नाम से भी जाना जाता है। इसके रचयिता प्राचीन तमिल कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर माने जाते हैं। इस ग्रंथ में कुल 1,330 संक्षिप्त दोहे हैं, जिन्हें 133 अध्यायों में बांटा गया है।
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तिरुक्कुरल को तीन प्रमुख हिस्सों में विभाजित किया गया है। पहला भाग अरम है, जिसमें सदाचार, नैतिकता और अच्छे आचरण की चर्चा की गई है। दूसरा भाग पोरुल है, जिसमें धन, सामाजिक जीवन, शासन, नेतृत्व और राजनीतिक जिम्मेदारियों जैसे विषय शामिल हैं। तीसरा भाग इनबम है, जो प्रेम, संबंधों और भावनात्मक जीवन से जुड़ा है।
इस कृति की खासियत इसकी संक्षिप्त शैली है। प्रत्येक कुरल केवल दो पंक्तियों में जीवन से जुड़ी गहरी सीख देता है। इसके बावजूद इसमें परिवार, मित्रता, न्याय, करुणा, नेतृत्व और मानवीय संबंधों जैसे व्यापक विषयों को शामिल किया गया है।
क्यों खास हैं तिरुवल्लुवर?
तिरुवल्लुवर तमिल साहित्य की सबसे प्रतिष्ठित हस्तियों में गिने जाते हैं। उनकी रचना सदियों बाद भी प्रासंगिक बनी हुई है, क्योंकि इसमें नैतिक जीवन, जिम्मेदार शासन और मानवीय व्यवहार जैसे सार्वभौमिक विषयों पर विचार मिलते हैं।
रूसी भाषा में तिरुक्कुरल की यह प्रति दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संवाद का प्रतीक भी है। इससे पहले दिसंबर 2025 में पीएम मोदी ने पुतिन को रूसी भाषा में भगवद्गीता की प्रति भी भेंट की थी।
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