प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 9 अगस्त 2026 को ऐतिहासिक भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने वाले स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि आंदोलन में शामिल लोगों का साहस और देश के प्रति समर्पण हमेशा प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा।
भारत छोड़ो आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे महत्वपूर्ण आंदोलनों में से एक था। महात्मा गांधी के नेतृत्व में 9 अगस्त 1942 को इस आंदोलन की शुरुआत हुई थी। इसका उद्देश्य ब्रिटिश शासन को भारत से समाप्त करने और देश को स्वतंत्र कराने के लिए निर्णायक जनआंदोलन खड़ा करना था।
प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता आंदोलन के उन सभी सेनानियों को याद किया, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष करते हुए देश की आजादी के लिए अपना योगदान दिया। उन्होंने कहा कि भारत छोड़ो आंदोलन ने स्वतंत्रता प्राप्त करने की भारत की कोशिश को निर्णायक गति प्रदान की थी।
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1942 में शुरू हुआ यह आंदोलन तेजी से पूरे देश में फैल गया था। महात्मा गांधी ने इस दौरान देशवासियों से अंग्रेजों के भारत छोड़ने की मांग को लेकर एकजुट होने का आह्वान किया था। आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने गिरफ्तारियां दीं और कई स्वतंत्रता सेनानियों ने कठिन परिस्थितियों का सामना किया।
भारत छोड़ो आंदोलन का नारा ‘करो या मरो’ स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान लोगों के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन गया था। आंदोलन ने ब्रिटिश सरकार पर राजनीतिक और जनदबाव बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने वाले लोगों की बहादुरी और त्याग को देश हमेशा याद रखेगा। उनके संघर्ष ने आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रभक्ति, एकता और देशसेवा की मिसाल कायम की।
हर वर्ष 9 अगस्त को भारत छोड़ो आंदोलन की वर्षगांठ के अवसर पर देश स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद करता है। यह दिन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास और आजादी के लिए किए गए संघर्ष की याद दिलाता है।
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