प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर 1947 के भारत विभाजन के पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने विभाजन के दौरान अपना घर-बार खोने वाले लोगों के साहस, संघर्ष और जिजीविषा को याद करते हुए देश में सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करने का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह दिन भारतीय इतिहास के सबसे दर्दनाक अध्यायों में से एक की याद दिलाता है। विभाजन ने अनगिनत जिंदगियां प्रभावित कीं, परिवारों को विस्थापित किया और बड़े पैमाने पर मानवीय पीड़ा पैदा की।
उन्होंने कहा कि विभाजन के दौरान कई परिवार उजड़ गए, लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया और असहनीय कठिनाइयों का सामना किया। प्रधानमंत्री ने उन लोगों के साहस को नमन किया, जिन्होंने इस त्रासदी के बावजूद हार नहीं मानी।
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मोदी ने कहा कि विभाजन से प्रभावित कई लोगों ने बेहद कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने जीवन को फिर से खड़ा किया। उन्होंने शून्य से शुरुआत की और आगे चलकर देश के विकास और प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इन लोगों की जीवन यात्रा मानव आत्मा की शक्ति और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। उन्होंने उम्मीद जताई कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस देश में सद्भाव और भाईचारे की भावना को और मजबूत करने का संकल्प गहरा करेगा। साथ ही, उन्होंने सभी नागरिकों से मिलकर विकसित भारत के निर्माण की दिशा में काम करने की अपील की।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी विभाजित पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि विभाजन के कारण भारी मानवीय पीड़ा हुई और इसके दूरगामी भू-राजनीतिक परिणाम भी सामने आए। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में अपने जीवन को दोबारा खड़ा करने वाले लोगों के साहस और धैर्य को सलाम किया।
भारत हर वर्ष 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाता है। इसका उद्देश्य 1947 के विभाजन में जान गंवाने वाले और विस्थापित हुए लोगों को याद करना है।
ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता मिलने के साथ ही भारत का विभाजन हुआ, जिसने इतिहास के सबसे बड़े जन विस्थापनों में से एक को जन्म दिया। अनुमान है कि करीब दो करोड़ लोग अपने घरों से विस्थापित हुए और लाखों परिवारों को नए स्थानों पर शून्य से जीवन शुरू करना पड़ा। विभाजन के दौरान हुई हिंसा की पीड़ा आज भी कई परिवारों की स्मृतियों में जीवित है।
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