तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पार्टी छोड़कर जा चुके सांसदों और विधायकों को वापस लौटने के लिए 15 दिन का समय दिया है। उत्तर बंगाल के उत्तर दिनाजपुर में विधानसभा चुनाव के बाद पहली बड़ी शक्ति प्रदर्शन रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने यह संदेश दिया।
मोबाइल फोन के जरिए कार्यकर्ताओं और लोगों को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी ने जिन कई सांसदों और विधायकों को चुनाव जिताने में मदद की, उन्होंने बाद में पार्टी से विश्वासघात किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जो नेता 15 दिनों के भीतर वापस आ जाएंगे, उनके बारे में विचार किया जा सकता है, लेकिन इसके बाद पार्टी में उनके लिए कोई जगह नहीं होगी।
ममता बनर्जी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस फिर सत्ता में लौटेगी और पार्टी की असली ताकत उसके जमीनी कार्यकर्ता हैं। उन्होंने कहा कि नेताओं से ज्यादा महत्वपूर्ण वे सामान्य कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने वर्षों से संगठन को मजबूत किया है।
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उन्होंने निर्वाचन आयोग पर भी तीखा हमला बोला। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि जब तक ज्ञानेश कुमार चुनाव आयोग की कमान संभाल रहे हैं, तब तक भारतीय जनता पार्टी सत्ता में बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि जिस तरह उन्होंने 1998 में तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी, उसी तरह वह पार्टी को दोबारा मजबूत कर सकती हैं।
ममता ने राष्ट्रीय राजनीति को लेकर भी पार्टी की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के बिना विपक्षी INDIA गठबंधन मजबूत नहीं हो सकता। उन्होंने कार्यकर्ताओं से भाजपा के खिलाफ लड़ाई के लिए तृणमूल कांग्रेस को मजबूत करने की अपील की।
बैठक में कल्याण बनर्जी और इताहर के विधायक मोसारफ हुसैन भी मौजूद थे।
तृणमूल कांग्रेस ने 35 वर्षों के वाम मोर्चे के शासन को समाप्त कर पश्चिम बंगाल में 15 साल तक सत्ता संभाली। हालांकि, इस वर्ष हुए विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद पार्टी में टूट शुरू हो गई। विद्रोही नेता ऋतब्रत बनर्जी के साथ कई विधायकों ने अलग गुट बनाकर खुद को असली तृणमूल बताया। वहीं 28 में से 20 सांसदों के पार्टी छोड़कर क्षेत्रीय नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल होने का दावा किया गया है।
पार्टी के ‘जुड़वां फूल’ चुनाव चिह्न को लेकर ऋतब्रत बनर्जी गुट के साथ विवाद अदालत में लंबित है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में निर्वाचन आयोग को इस मामले पर निर्णय लेने के लिए तीन महीने का समय दिया है।
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