प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर की महिलाओं को संबोधित करते हुए महिला आरक्षण कानून के महत्व पर एक भावुक पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से लंबित इस सुधार को अब और टाला नहीं जा सकता और इसे जल्द लागू करना आवश्यक है।
यह पत्र ऐसे समय में आया है जब संसद का महत्वपूर्ण सत्र शुरू होने वाला है, जिसमें सरकार महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। प्रधानमंत्री ने अपने पत्र की शुरुआत 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए की।
उन्होंने डॉ. अंबेडकर को राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा बताते हुए कहा कि भारत आज भी उनके संवैधानिक मूल्यों से मार्गदर्शन प्राप्त कर रहा है।
और पढ़ें: महिला आरक्षण संशोधन पर संसद सत्र से पहले मल्लिकार्जुन खड़गे का केंद्र पर हमला
अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की महिलाएं आज स्टार्टअप, विज्ञान, शिक्षा, कला, खेल और ग्रामीण उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। उन्होंने महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप, “लखपति दीदी” योजनाओं और महिला खिलाड़ियों की उपलब्धियों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि जब महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, तो राजनीतिक प्रतिनिधित्व में उनकी भागीदारी और भी जरूरी हो जाती है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि “महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना देश का विकास संभव नहीं है।”
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि महिला आरक्षण का विचार दशकों पुराना है और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे नेताओं के समय से इस पर सहमति रही है, लेकिन अब तक इसे पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका है।
उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे इस संविधान संशोधन का समर्थन करें और इसे समय पर पारित करने में सहयोग दें।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि 2047 में जब भारत स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की समान भागीदारी निर्णायक भूमिका निभाएगी।
और पढ़ें: महिला आरक्षण कानून समानता की दिशा में बड़ा संकल्प: नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी