पोप लियो चौदहवें ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आलोचनाओं का करारा जवाब देते हुए कहा है कि उन्हें ट्रंप प्रशासन से कोई डर नहीं है और वे शांति का संदेश देते रहेंगे। अल्जीरिया जाते समय विमान में पोप ने कहा कि उनका संदेश राजनीति से नहीं, बल्कि ईसाई धर्मग्रंथ ‘गॉस्पेल’ से प्रेरित है।
पोप लियो ने कहा, “मेरे संदेश को राष्ट्रपति की राजनीतिक बातों से जोड़ना गॉस्पेल के अर्थ को समझने में भूल है। मैं वही करूंगा जो चर्च का मिशन है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणियां किसी व्यक्ति विशेष पर हमला नहीं थीं, बल्कि वैश्विक तनाव, खासकर ईरान विवाद के बीच शांति की अपील थीं।
उन्होंने कहा, “मैं बहस में नहीं पड़ूंगा। गॉस्पेल का संदेश साफ है—शांति स्थापित करने वाले धन्य हैं।” उन्होंने यह भी दोहराया कि वे लोगों को युद्ध से बचने और शांति व संवाद का रास्ता अपनाने के लिए प्रेरित करते रहेंगे।
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वहीं, ट्रंप ने पोप पर तीखा हमला करते हुए उन्हें “कमजोर” और “अत्यधिक उदारवादी” बताया। उन्होंने कहा कि पोप विदेश नीति और अपराध जैसे मुद्दों पर सही काम नहीं कर रहे हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि वे ऐसे पोप को पसंद नहीं करते जो ईरान के परमाणु हथियार रखने के मुद्दे पर नरम रुख अपनाए।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है। पोप ने पहले भी चेतावनी दी थी कि दुनिया में युद्ध “असीम शक्ति के भ्रम” के कारण हो रहे हैं।
वेटिकन और व्हाइट हाउस के बीच इस तरह का सार्वजनिक टकराव दुर्लभ माना जाता है। चर्च के कई नेताओं ने भी ट्रंप की टिप्पणियों पर चिंता जताई और कहा कि पोप एक आध्यात्मिक नेता हैं, न कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी।
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