पंजाब की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के रिश्तेदार ने आम आदमी पार्टी (आप) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया है। इस घटनाक्रम ने राज्य की सियासत में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।
यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब पिछले महीने आम आदमी पार्टी के कई वरिष्ठ सांसदों ने भी पार्टी से दूरी बना ली थी। इनमें राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल जैसे नाम शामिल हैं, जिन्होंने बाद में भाजपा नेतृत्व की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली थी।
राजनीतिक हलकों में इसे आम आदमी पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि एक के बाद एक प्रमुख नेता और अब मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़े सदस्य का पार्टी छोड़ना संगठन की स्थिति पर सवाल खड़े कर रहा है।
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भाजपा ने इस नए शामिल होने वाले सदस्य का स्वागत किया है और इसे पंजाब में पार्टी के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि आने वाले समय में और भी कई प्रमुख हस्तियां भाजपा में शामिल हो सकती हैं।
हालांकि आम आदमी पार्टी की ओर से इस पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम राज्य की आगामी राजनीतिक रणनीति को प्रभावित कर सकता है।
इससे पहले भी पंजाब की राजनीति में कई बड़े नाम दल बदल चुके हैं, जिनमें हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रमजीत सिंह साहनी और स्वाति जैसे नेता शामिल रहे हैं।
पंजाब में लगातार हो रहे इन राजनीतिक बदलावों ने राज्य की सियासत को और अधिक गर्मा दिया है और आने वाले दिनों में और बड़े राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना जताई जा रही है।
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