झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता रघुवर दास ने बुधवार, 12 अगस्त को राज्य सरकार को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार एक सप्ताह के भीतर मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की सिफारिश नहीं करती है, तो वह भूख हड़ताल पर बैठने के लिए मजबूर होंगे।
रघुवर दास ने रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन कर रहे छात्रों को संबोधित करते हुए यह घोषणा की। झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी सुधार मंच के बैनर तले हजारों छात्र पिछले 19 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं।
दास ने झामुमो सरकार पर राज्य के लाखों छात्रों के भविष्य को खतरे में डालने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि पिछले छह वर्षों में भर्ती परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर कथित घोटाले हुए हैं। भाजपा नेता ने 2024 में आबकारी सिपाही भर्ती की शारीरिक परीक्षा के दौरान जान गंवाने वाले 19 अभ्यर्थियों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग भी की।
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छात्रों का आंदोलन 25 जुलाई से जारी है। प्रदर्शनकारी जेएसएससी-सीजीएल, जेएसएससी-जेई और 2019 के बाद आयोजित पीजीटी परीक्षाओं को रद्द करने, अनियमितताओं की सीबीआई जांच और कथित “परीक्षा माफिया” के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वे श्रेणीवार कटऑफ, ओएमआर कॉपियां और उत्तर पुस्तिकाएं सार्वजनिक करने तथा यूपीएससी और एसएससी की तर्ज पर भर्ती कैलेंडर जारी करने की भी मांग कर रहे हैं।
10 अगस्त को विधानसभा घेराव मार्च के दौरान पुलिस ने आंसू गैस, पानी की बौछार और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया था। इसके बाद सरकार ने भर्ती अनियमितताओं पर सीआईडी जांच, संदिग्ध वित्तीय गड़बड़ियों की प्रवर्तन निदेशालय जांच, फास्ट-ट्रैक अदालत और भर्ती सुधारों के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने की घोषणा की है।
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