लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को कथित चुनावी अनियमितताओं के खिलाफ ‘इंडिया’ गठबंधन का आंदोलन जारी रखने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में इस्तेमाल करने पर लगी रोक के फैसले को चुनौती देगा और देश में वास्तविक लोकतंत्र बहाल करने के लिए संघर्ष करेगा।
राहुल गांधी के आवास पर विपक्षी नेताओं, सांसदों और छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों की चाय बैठक के बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई। राहुल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को कथित तौर पर नुकसान पहुंचाने वालों को जवाबदेह ठहराया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन लोगों को समझना चाहिए कि उनके चारों ओर घेरा कस रहा है और संविधान को नुकसान पहुंचाकर बच निकलना आसान नहीं होगा।
राहुल ने कहा कि विपक्ष का आंदोलन एकजुट है और इसका उद्देश्य लोकतंत्र की बहाली है। उन्होंने भरोसा जताया कि यह संघर्ष कई दिन, महीने या साल तक जारी रह सकता है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय और न्यायपालिका के प्रति सम्मान जताते हुए कहा कि संस्थाओं की भूमिका के बावजूद राजनीतिक और जन आंदोलन जारी रहेगा।
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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने दावा किया कि पिछले चार दिनों के आंदोलन में युवाओं और आम नागरिकों ने हिस्सा लिया है। राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने भी चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले और समाजवादी पार्टी के सांसद हरेंद्र मलिक ने विपक्ष की एकजुटता दोहराई।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव डी. राजा ने जंतर-मंतर को फिर प्रदर्शन स्थल बनाने की मांग की। शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त की आलोचना की।
तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) रोकने, पुरानी मतदाता सूचियां बहाल करने और कथित चुनावी अनियमितताओं की जांच की मांग की। विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग भी दोहराई।
विपक्षी नेताओं ने इससे पहले दिल्ली में मार्च निकाला था और एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में संयुक्त याचिका दाखिल की थी। चुनावी गड़बड़ी और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के आरोप विपक्ष के दावे हैं।
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