राजस्थान के नगर निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 10 में से कम से कम पांच नगर निगमों में मेयर बनाने की स्थिति हासिल कर ली है। जयपुर, कोटा, उदयपुर, अलवर और भीलवाड़ा में पार्टी का प्रदर्शन बेहद मजबूत रहा है। जोधपुर में भी बीजेपी मेयर बनाने की स्थिति में पहुंच सकती है।
बीजेपी की जीत के बाद राज्य में सियासी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा मंगलवार को दिल्ली रवाना होंगे, जहां उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात हो सकती है। चुनाव परिणामों और आगामी राजनीतिक रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। जयपुर स्थित बीजेपी कार्यालय में कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों के साथ जीत का जश्न मनाया और मुख्यमंत्री का जोरदार स्वागत किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बीजेपी की जीत पर कार्यकर्ताओं और राजस्थान की जनता को बधाई दी। उन्होंने कहा कि राजस्थान की जनता ने बीजेपी को प्रचंड जीत देकर सुशासन और विकास की नीतियों में अपना विश्वास जताया है।
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पांच निगमों में बीजेपी का मेयर लगभग तय
10 नगर निगमों के परिणामों में बीजेपी को जयपुर, कोटा, उदयपुर, अलवर और भीलवाड़ा में स्पष्ट बढ़त मिली है। कांग्रेस को केवल बीकानेर नगर निगम में बहुमत हासिल हुआ, जहां उसका मेयर बनना लगभग तय है। अजमेर और पाली में कांग्रेस के पार्षद अधिक हैं, लेकिन यहां निर्दलीय पार्षद मेयर चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। भरतपुर में निर्दलीयों ने 65 में से 38 वार्ड जीतकर दोनों प्रमुख दलों को पीछे छोड़ दिया।
4,179 वार्डों में बीजेपी की जीत
राज्य के 309 नगरीय निकायों में दो चरणों में हुए चुनाव में कुल 10,167 वार्डों के लिए मतदान हुआ। बीजेपी ने 4,179 वार्ड जीते, जबकि कांग्रेस को 3,613 वार्ड मिले।
जोधपुर में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह वार्ड में बीजेपी ने जीत दर्ज की, जबकि केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के वार्ड में कांग्रेस उम्मीदवार विजयी हुआ। कोटा में भी कांग्रेस को बड़ा झटका लगा। यहां बीजेपी ने 55 और कांग्रेस ने 39 सीटें जीतीं।
हालांकि टोंक में कांग्रेस ने 59 में से 32 सीटें जीतकर राहत दी। इसे कांग्रेस नेता सचिन पायलट के प्रभाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
वहीं पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के गढ़ झालरापाटन में बीजेपी ने 35 में से 22 सीटें जीतकर मजबूत प्रदर्शन किया।
बीजेपी की जीत के बावजूद जयपुर में पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले सभी मुस्लिम उम्मीदवार हार गए। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने चुनाव में सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाया, जिसे बीजेपी ने खारिज कर दिया। अब बीजेपी की नजर पंचायत चुनावों पर है।
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