सोमवार (9 फरवरी, 2026) को राज्यसभा में विपक्ष ने वॉकआउट किया। यह कदम उस विवाद के विरोध में उठाया गया जिसमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान अपनी बात पूरी करने से रोका गया।
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने दिन की कार्यवाही की शुरुआत में इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते पर संसद में बयान देने की बजाय मीडिया से प्रेस कांफ्रेंस की।
खड़गे ने दोपहर के प्रश्नकाल की शुरुआत में इस मामले को दोबारा उठाने का प्रयास किया। राज्यसभा अध्यक्ष सी.पी. राधाकृष्णन ने उन्हें बोलने की अनुमति दी, लेकिन अन्य सदन में हुई कार्यवाही का जिक्र न करने की चेतावनी दी।
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विपक्ष का कहना है कि सरकार लोकसभा में राहुल गांधी को अपनी बात रखने की अनुमति नहीं दे रही, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया बाधित हो रही है। विपक्ष ने इसे सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही पर प्रश्न उठाने के प्रयास में बाधा मानते हुए विरोध जताया।
राज्यसभा में वॉकआउट के दौरान विपक्षी सांसद अपनी नाराजगी प्रकट करते हुए कहा कि लोकतंत्र में सभी पार्टियों और सांसदों को समान रूप से बोलने का अधिकार होना चाहिए। विपक्ष का यह कदम संसद की कार्यवाही और लोकतांत्रिक आदर्शों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता पर सवाल उठाता है।
इस वॉकआउट से स्पष्ट हुआ कि संसद में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ती खटास जारी है और विपक्ष सरकार को जवाबदेह ठहराने के लिए कड़े कदम उठा रहा है।
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