पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस बीच प्रकाशन संस्था पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया (PRHI) ने स्पष्ट किया है कि इस किताब की कोई भी प्रति अभी तक आधिकारिक रूप से प्रकाशित नहीं हुई है। यह बयान उस समय सामने आया जब किताब की कथित अनधिकृत प्रतियों के प्रसार की खबरें सामने आईं और दिल्ली पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की।
सोमवार को जारी आधिकारिक बयान में PRHI ने कहा कि जनरल नरवणे की इस आत्मकथा के प्रकाशन का विशेष अधिकार केवल उनके पास है और अब तक किताब का कोई भी प्रिंट या डिजिटल संस्करण जनता के लिए जारी नहीं किया गया है। प्रकाशक ने कहा कि फिलहाल जो भी प्रतियां प्रचलन में हैं, वे पूरी तरह अनधिकृत हैं और उन्हें आधिकारिक रिलीज नहीं माना जा सकता।
PRHI ने अपने बयान में कहा कि किताब की किसी भी प्रकार की कॉपी—चाहे वह प्रिंट, डिजिटल, पीडीएफ या किसी अन्य फॉर्मेट में हो—यदि ऑनलाइन या ऑफलाइन साझा की जा रही है, तो यह कॉपीराइट का उल्लंघन है और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए।
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इस पूरे विवाद ने संसद में भी राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को संसद में इस किताब की एक प्रति लेकर जाते हुए देखा गया। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी ने नरवणे की अप्रकाशित किताब के अंशों पर आधारित एक लेख से उद्धरण देने की कोशिश की थी, जिसमें 2020 के भारत-चीन सीमा विवाद का जिक्र था।
हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष ने उन्हें ऐसा करने की अनुमति नहीं दी, जिसके बाद 3 फरवरी से संसद में लगातार हंगामा हो रहा है। विपक्ष का आरोप है कि उन्हें महत्वपूर्ण मुद्दों पर बोलने से रोका जा रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि अप्रकाशित सामग्री का हवाला देना उचित नहीं है।
इस विवाद के चलते किताब के आधिकारिक प्रकाशन से पहले ही यह राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का विषय बन गई है।
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