अयोध्या के राम मंदिर में दान राशि की कथित चोरी के मामले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों को मुख्य आरोपी अनुकल्प मिश्रा और उसके साले लवकुश मिश्रा से जुड़ी करोड़ों रुपये की संपत्तियों का पता चला है। इससे यह आशंका गहरा गई है कि कहीं मंदिर से कथित रूप से चोरी की गई दान राशि का इस्तेमाल इन संपत्तियों को खरीदने में तो नहीं किया गया।
सूत्रों के अनुसार, अब तक अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा से जुड़ी कम से कम 12 संपत्तियों की पहचान की जा चुकी है। इन संपत्तियों की कीमत कई करोड़ रुपये बताई जा रही है। अयोध्या प्रशासन इन सभी संपत्तियों का विस्तृत सत्यापन कर रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनमें कौन-सी पैतृक हैं और कौन-सी हाल के वर्षों में खरीदी गई हैं।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों के नाम पर ही नहीं, बल्कि उनके परिजनों के नाम पर भी कई संपत्तियां खरीदी गई हैं। ये संपत्तियां केवल अयोध्या तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बसावा, मिल्कीपुर और रुदौली जैसे आसपास के क्षेत्रों में भी फैली हुई हैं।
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इसी के साथ पुलिस और विशेष जांच दल (एसआईटी) मंदिर की दान राशि से जुड़े वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों और धन के प्रबंधन की भी गहन जांच कर रहे हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस मामले में केवल कुछ लोग शामिल थे या फिर इसमें किसी बड़े नेटवर्क या प्रणालीगत लापरवाही की भी भूमिका रही है।
पुलिस द्वारा गिरफ्तार आरोपियों के बैंक खातों की गहन पड़ताल में यह भी सामने आया है कि बड़ी मात्रा में धन जमा कराया गया था या फिर उसका उपयोग संपत्ति खरीदने में किया गया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आरोपी अपने बैंक खातों में जमा बड़ी रकम के संबंध में संतोषजनक जवाब नहीं दे पा रहे हैं। इसी आधार पर पुलिस लगातार उनसे पूछताछ कर रही है।
अधिकारियों का कहना है कि वित्तीय दस्तावेजों और संपत्ति संबंधी रिकॉर्ड की जांच अभी जारी है तथा आने वाले दिनों में इस मामले में और भी महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है।
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