बिहार में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) से समर्थन के लिए संपर्क किया है। इसके बदले एआईएमआईएम ने अपनी पार्टी के लिए विधान परिषद (एमएलसी) की एक सीट की मांग रखी है। हालांकि इस मांग पर अभी तक आरजेडी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
इससे पहले एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने कहा कि अगर आरजेडी बातचीत के लिए आगे नहीं आती है तो उनकी पार्टी मतदान में हिस्सा नहीं लेगी। उन्होंने यह भी कहा कि आरजेडी का उम्मीदवार तभी जीत सकता है जब उसे एआईएमआईएम के पांच विधायकों और बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के एक विधायक का समर्थन मिले।
बिहार से राज्यसभा की पांच सीटों के लिए चुनाव होना है, लेकिन मैदान में छह उम्मीदवार बने हुए हैं। नामांकन वापसी की अंतिम तिथि सोमवार को समाप्त हो गई और किसी भी उम्मीदवार ने अपना नाम वापस नहीं लिया। बिहार विधानसभा की सचिव ख्याति सिंह के अनुसार अब सभी छह उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे।
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सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने पांच उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं, जबकि विपक्ष की ओर से एक उम्मीदवार उतारा गया है। प्रमुख उम्मीदवारों में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और बिहार भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन शामिल हैं। दोनों नेताओं ने 5 मार्च को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया था।
एनडीए के अन्य उम्मीदवारों में केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा और भाजपा के प्रदेश महासचिव शिवेश कुमार शामिल हैं।
वहीं आरजेडी ने अमरेंद्र धारी सिंह को उम्मीदवार बनाया है। बिहार विधानसभा की 243 सदस्यीय सदन में एनडीए के पास 202 विधायक हैं, फिर भी सभी पांच सीटें जीतने के लिए उसे तीन अतिरिक्त वोटों की जरूरत है। ऐसे में एआईएमआईएम की भूमिका इस चुनाव में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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