गाजियाबाद के साहिबाबाद रैपिड मेट्रो स्टेशन के पास 19 सितंबर की रात सड़क हादसे में घायल 24 वर्षीय तुषार कुमार की दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। तुषार के पिता शिव कुमार ने इंदिरापुरम के यशोदा मेडिसिटी अस्पताल पर इलाज और बिल को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि बेटे के इलाज का खर्च जुटाने के लिए उन्हें जमीन गिरवी रखनी पड़ी और साहूकार से ब्याज पर पैसे लेने पड़े।
जानकारी के मुताबिक, तुषार ऑफिस से घर लौट रहा था। रात करीब 2:30 बजे साहिबाबाद नमो भारत स्टेशन से लगभग 100 मीटर दूर किसी अज्ञात वाहन ने उसे टक्कर मार दी। राहगीर रोहित शर्मा ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस घायल तुषार को पहले वसुंधरा के अटलांटा अस्पताल लेकर पहुंची, लेकिन सर्जन उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर उसे भर्ती नहीं किया गया। इसके बाद उसे यशोदा मेडिसिटी अस्पताल ले जाया गया।
तुषार के पिता का आरोप है कि भर्ती के करीब 30-35 मिनट बाद ही अस्पताल ने करीब 47,800 रुपये का बिल बताया। उन्होंने बेटे को एमएमजी अस्पताल या दिल्ली के किसी सरकारी अस्पताल में रेफर करने का अनुरोध किया, लेकिन उनका कहना है कि उनकी बात नहीं मानी गई।
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शिव कुमार के मुताबिक, चार से पांच घंटे की मशक्कत के बाद उन्होंने साहूकार से ब्याज पर 70 हजार रुपये उधार लिए। इनमें से करीब 45 हजार रुपये अस्पताल में जमा किए गए। इसके बाद लगभग छह हजार रुपये एंबुलेंस के किराये में खर्च कर तुषार को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। 20 सितंबर की शाम करीब चार बजे उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
यशोदा मेडिसिटी अस्पताल ने आरोपों से अलग घटनाक्रम बताया। अस्पताल के अनुसार, मरीज की तत्काल जांच कर आवश्यक उपचार शुरू किया गया था और आर्थिक रियायत भी दी गई थी। अस्पताल का कहना है कि चिकित्सकीय सलाह के बावजूद परिजनों ने अपनी इच्छा से मरीज को एलएएमए (Leave Against Medical Advice) के तहत ले जाने का निर्णय लिया।
पुलिस मामले के तथ्यों की जांच कर रही है।
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