पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता स्थित साल्ट लेक स्टेडियम के बाहर लगी विवादित फुटबॉल थीम वाली मूर्ति को ध्वस्त कर दिया गया। यह मूर्ति पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की परिकल्पना पर आधारित बताई जाती थी और स्टेडियम के नवीनीकरण के बाद स्थापित की गई थी।
मूर्ति में कमर तक मानव पैरों की आकृति बनाई गई थी, जिसके ऊपर ‘बिस्वा बांग्ला’ का लोगो लगा था। पैरों के पास बने फुटबॉल पर ‘जयी’ शब्द लिखा गया था। हालांकि स्थापना के बाद से ही यह मूर्ति विवादों में घिर गई थी और इसके डिजाइन तथा प्रतीकात्मकता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने अब इस संरचना को हटाने का फैसला लिया। पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री निशीथ प्रमाणिक ने 17 मई को मोहन बागान और ईस्ट बंगाल के बीच खेले गए कोलकाता डर्बी मैच के दौरान इस मूर्ति की आलोचना करते हुए इसे “अजीब और असहज दिखने वाली संरचना” बताया था।
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खेल विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, इस मूर्ति को हटाने का फैसला लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के साथ चर्चा के बाद लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि साल्ट लेक स्टेडियम, जिसे विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन के नाम से भी जाना जाता है, पश्चिम बंगाल के फुटबॉल प्रेमियों के लिए भावनात्मक महत्व रखता है। इसलिए स्टेडियम के बाहर ऐसी पहचान बनाई जानी चाहिए जो राज्य की फुटबॉल विरासत को सही तरीके से दर्शाए।
मूर्ति हटाए जाने के बाद अब वहां केवल फुटबॉल और जूते का हिस्सा बचा है। सरकार अब इस स्थान पर किसी प्रसिद्ध फुटबॉलर की प्रतिमा लगाने पर विचार कर रही है, ताकि युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा मिल सके।
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