ऐसे समय में जब स्वैच्छिक सेवा अक्सर अनौपचारिक और अस्थायी मानी जाती है, पीजीआई चंडीगढ़ की संरचित स्वयंसेवी पहल ‘SARATHI’ ने निरंतर और अनुशासित सेवा का नया राष्ट्रीय मानक स्थापित किया है। इस पहल ने देश के एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थान में 1,00,000 से अधिक घंटे की स्वैच्छिक सेवा पूरी कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
SARATHI का आधिकारिक उद्घाटन 5 मई 2024 को किया गया था। इसके बाद से लगभग 1,700 छात्र स्वयंसेवकों ने इस पहल से जुड़कर औसतन 60 घंटे की सेवा दी है। इन स्वयंसेवकों ने अस्पताल में मरीजों की सहायता, मार्गदर्शन और अन्य जरूरी कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
पीजीआई के निदेशक विवेक लाल ने इस उपलब्धि पर कहा कि SARATHI भारत में स्वैच्छिक सेवा को देखने और अपनाने के तरीके में बदलाव का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “स्वैच्छिक सेवा तभी सार्थक होती है जब वह निरंतर, जवाबदेह और सहानुभूति पर आधारित हो। SARATHI ने यह दिखाया है कि जब सेवा को मूल्यों और अनुशासन के साथ किया जाता है, तो यह संस्थागत मजबूती का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन सकती है।”
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उन्होंने कहा कि स्वयंसेवकों द्वारा दिया गया हर घंटा मरीजों की सेवा के लिए समर्पित समय को दर्शाता है। यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवा में सहयोग बढ़ा रही है, बल्कि युवाओं में सामाजिक जिम्मेदारी और सेवा भावना को भी मजबूत कर रही है।
SARATHI की सफलता से उम्मीद है कि देश के अन्य संस्थान भी इस मॉडल को अपनाकर संगठित और प्रभावी स्वयंसेवा को बढ़ावा देंगे।
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