कर्नाटक की राजनीति में एक ऐतिहासिक पड़ाव के बेहद करीब खड़े मुख्यमंत्री सिद्धारमैया बुधवार को इतिहास रचने जा रहे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया 2,792 दिन पूरे कर चुके हैं और इसके साथ ही उन्होंने दिवंगत डी. देवरााज उर्स के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है। 7 जनवरी को वह उर्स को पीछे छोड़ते हुए कर्नाटक के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता बन जाएंगे।
पिछले पांच दशकों में राजनीतिक अस्थिरता से जूझते रहे कर्नाटक में केवल दो ही मुख्यमंत्री ऐसे रहे हैं, जिन्होंने पूरे पांच साल का कार्यकाल पूरा किया — डी. देवराज उर्स और सिद्धारमैया। यह उपलब्धि ऐसे समय में सामने आ रही है, जब कांग्रेस पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर खींचतान तेज हो गई है।
दरअसल, 20 नवंबर को कांग्रेस सरकार ने अपने पांच वर्षीय कार्यकाल का आधा सफर पूरा किया, जिसके बाद से ही मुख्यमंत्री बदले जाने की अटकलें तेज हो गईं। इन अटकलों को 2023 में सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच हुए कथित “पावर-शेयरिंग” समझौते से और बल मिला। पार्टी के भीतर एक धड़ा नेतृत्व परिवर्तन की संभावना जता रहा है, जबकि दूसरा धड़ा सिद्धारमैया के अनुभव और प्रशासनिक पकड़ को सरकार के लिए जरूरी बता रहा है।
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सिद्धारमैया का राजनीतिक सफर सामाजिक न्याय, पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों के मुद्दों पर केंद्रित रहा है। उनके समर्थकों का कहना है कि उन्होंने न केवल स्थिर सरकार दी, बल्कि कल्याणकारी योजनाओं के जरिए कांग्रेस की सामाजिक न्याय की राजनीति को मजबूती दी। वहीं आलोचकों का मानना है कि पार्टी के अंदरूनी मतभेद और सत्ता संतुलन की राजनीति आने वाले समय में चुनौतियां खड़ी कर सकती है।
इतिहास के इस मोड़ पर सिद्धारमैया की उपलब्धि जहां व्यक्तिगत रिकॉर्ड है, वहीं उनकी राजनीतिक विरासत अभी पूरी तरह आकार लेनी बाकी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि वह इस उपलब्धि को पार्टी की एकजुटता और सरकार की स्थिरता में कैसे बदलते हैं।
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