11 मार्च 2026 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हरियाणा और चंडीगढ़ में IDFC First बैंक से ₹590 करोड़ के कथित गबन के मामले में 19 स्थानों पर छापेमारी की।
सूत्रों के मुताबिक, छापे हरियाणा और चंडीगढ़ में उन व्यापारिक संस्थाओं के खिलाफ मारे गए, जिन्होंने आरोपित व्यक्तियों को कागजी कारोबार (accommodation entries) करने में मदद की, जिससे अपराध की राशि और धन के प्रवाह को छुपाया जा सके।
प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि सरकारी विभागों को बैंक में धन जमा करने के लिए भेजा गया था, लेकिन आरोप है कि इस धन को एफडी में जमा करने के बजाय, आरोपियों ने इसे अपनी व्यक्तिगत जरूरतों के लिए उपयोग किया।
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सूत्रों ने बताया कि जांच के दौरान, कई व्यापारिक संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई की गई, जिनसे मुख्य आरोपियों, पूर्व बैंक अधिकारियों और वास्तविक संपत्ति के एजेंटों ने लाभ उठाया।
प्रारंभिक जांच में यह भी पाया गया कि बड़ी रकम को विभिन्न शैल कंपनियों और ज्वेलरी कंपनियों में ट्रांसफर किया गया, जिनका उद्देश्य सोने की खरीद और रियल एस्टेट निवेश के बहाने इन धनराशियों को हड़पना था।
एक चंडीगढ़ आधारित होटल व्यवसायी, विक्रम वधवा का नाम भी इस मामले में सामने आया है, जो ट्राइसिटी में रियल एस्टेट परियोजनाओं के निर्माण में शामिल थे और घोटाले का खुलासा होते ही फरार हो गए।
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