कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया ने आंतरिक आरक्षण के मुद्दे पर अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए सामाजिक न्याय की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर आगे बढ़ते समय यह पहचानना जरूरी है कि कौन उनके साथ है और कौन उनके विरोध में।
सिद्धारमैया ने कहा कि उन्होंने मौजूदा कर्नाटक सरकार में जी. परमेश्वर को उपमुख्यमंत्री बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने इस बात का उल्लेख करते हुए सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर अपने रुख को स्पष्ट किया।
आंतरिक आरक्षण लंबे समय से कर्नाटक में राजनीतिक और सामाजिक बहस का प्रमुख विषय रहा है। इसके समर्थकों का तर्क है कि आरक्षण का लाभ संबंधित समुदायों के भीतर जरूरतमंद और पिछड़े वर्गों तक समान रूप से पहुंचना चाहिए। इसी उद्देश्य से विभिन्न समूहों के बीच आरक्षण के आंतरिक बंटवारे की मांग उठती रही है।
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सिद्धारमैया ने कहा कि सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को मजबूत करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति जरूरी है। उन्होंने संकेत दिया कि आंतरिक आरक्षण के मुद्दे पर उनका रुख स्पष्ट है और वह इससे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
उन्होंने अपने राजनीतिक सहयोगियों और विरोधियों को लेकर भी कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने का संदेश दिया। सिद्धारमैया ने कहा कि किसी भी राजनीतिक संघर्ष में यह पहचानना महत्वपूर्ण है कि वास्तव में कौन साथ खड़ा है और कौन विरोध कर रहा है।
जी. परमेश्वर को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने अपनी राजनीतिक भूमिका को भी रेखांकित किया। कर्नाटक की राजनीति में सामाजिक न्याय, आरक्षण और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधित्व को लेकर बहस लगातार जारी है।
सिद्धारमैया के ताजा बयान से संकेत मिलता है कि आने वाले समय में आंतरिक आरक्षण का मुद्दा राज्य की राजनीति में एक बार फिर प्रमुख भूमिका निभा सकता है।
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