सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (19 जनवरी, 2026) को मध्य प्रदेश सरकार को राज्य के मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी देने या न देने पर निर्णय लेने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। विजय शाह पर भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप है।
यह मामला उस समय सामने आया जब कर्नल सोफिया कुरैशी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान मीडिया को आधिकारिक जानकारी दी थी। इसके बाद विजय शाह की कथित टिप्पणी को लेकर व्यापक आलोचना हुई और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। शीर्ष अदालत ने इस प्रकरण को बेहद गंभीरता से लेते हुए विजय शाह की टिप्पणियों पर कड़ा रुख अपनाया।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सशस्त्र बलों के अधिकारियों के सम्मान और गरिमा से जुड़ा यह मामला केवल व्यक्तिगत टिप्पणी तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे संस्थागत सम्मान और अनुशासन पर भी असर पड़ता है। अदालत ने कहा कि इस तरह की टिप्पणियां न केवल अनुचित हैं, बल्कि समाज में गलत संदेश भी देती हैं।
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इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच टीम (SIT) के गठन का आदेश दिया था। एसआईटी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी कि वह पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच करे और तथ्यों के आधार पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे। अदालत ने यह भी कहा था कि कानून के दायरे में रहते हुए किसी भी व्यक्ति को विशेष संरक्षण नहीं दिया जा सकता, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो।
अब अदालत ने मध्य प्रदेश सरकार से अपेक्षा की है कि वह तय समयसीमा के भीतर अभियोजन की मंजूरी को लेकर स्पष्ट निर्णय ले। सुप्रीम कोर्ट ने यह संकेत भी दिया कि यदि तय अवधि में फैसला नहीं किया गया, तो वह आगे कड़ा रुख अपना सकता है।
इस मामले पर देशभर में राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई संगठनों और पूर्व सैन्य अधिकारियों ने कर्नल सोफिया कुरैशी के समर्थन में आवाज उठाई है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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