सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व वाले चुनाव आयोग के कामकाज और उसके फैसलों को चुनौती देने वाली याचिका पर अगले सप्ताह जल्द सुनवाई के लिए सहमति जताई है। यह मामला मंगलवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने रखा गया।
वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। उन्होंने पीठ के समक्ष दलील दी कि वैधानिक व्यवस्था के अनुसार बहुसदस्यीय चुनाव आयोग के फैसले सर्वसम्मति से या बहुमत के आधार पर लिए जाने चाहिए।
विकास सिंह ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में इस बात को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि चुनाव आयोग के फैसले वास्तव में सर्वसम्मति से लिए जा रहे हैं या नहीं। उन्होंने इसी आधार पर मामले की जल्द सुनवाई की मांग की।
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याचिका पर सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के साथ न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ मौजूद थी। सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी 29 सितंबर की कार्यवाही के लिए यही पीठ दर्ज है।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब चुनाव आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया को लेकर सार्वजनिक बहस चल रही है। इससे पहले चुनाव आयोग ने कहा था कि पिछले एक वर्ष में पूर्ण आयोग द्वारा लिए गए सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग ने यह भी कहा था कि अलग-अलग राय और टिप्पणियां संस्थागत विचार-विमर्श का सामान्य हिस्सा हैं।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से मामले को अगले सप्ताह सुनने पर सहमति दिए जाने के बाद अब याचिका में उठाए गए सवालों पर न्यायालय की सुनवाई होगी। हालांकि, अदालत ने अभी इन आरोपों या याचिका में उठाए गए मुद्दों पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।
मामला चुनाव आयोग के बहुसदस्यीय ढांचे में निर्णय लेने की प्रक्रिया और वैधानिक प्रावधानों से जुड़ा है। आगे की सुनवाई में याचिकाकर्ता की दलीलों के साथ चुनाव आयोग का पक्ष भी सामने आ सकता है।
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