गुजरात सीआईडी क्राइम की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने कथित फर्जी राजनीतिक चंदे और टैक्स चोरी के नेटवर्क को लेकर चार एफआईआर दर्ज की हैं। ये मामले पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (आरयूपीपी) के जरिए कथित तौर पर किए गए 2,284 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी दान और सैकड़ों करोड़ रुपये के टैक्स नुकसान से जुड़े हैं।
आयकर विभाग की शिकायतों के अनुसार, करदाताओं से बैंकिंग माध्यमों जैसे आरटीजीएस और चेक के जरिए राजनीतिक दलों के खातों में रकम जमा कराई जाती थी। इसके बदले कथित तौर पर दान की रसीदें दी जाती थीं, जिनके आधार पर करदाता राजनीतिक योगदान पर मिलने वाली टैक्स कटौती का दावा करते थे।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि यह रकम वास्तविक राजनीतिक चंदे के रूप में दलों के पास नहीं रहती थी। कथित तौर पर धन को दूसरी संस्थाओं या शेल कंपनियों के खातों में भेजा जाता था। कुछ लेन-देन को सही कारोबारी गतिविधि दिखाने के लिए कथित फर्जी खरीद बिल और दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद रकम नकद निकाली जाती और कमीशन काटकर उसका बड़ा हिस्सा मूल दानदाताओं को वापस कर दिया जाता था।
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चारों एफआईआर में भारतीय राष्ट्रीय जनता दल (बीएनजेडी), स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी (एसएपी), गरीब कल्याण पार्टी (जीकेपी) और सत्यवादी रक्षक पार्टी (एसआरपी) के नाम सामने आए हैं।
सबसे बड़ा मामला बीएनजेडी से जुड़ा है। एफआईआर के मुताबिक, वित्त वर्ष 2019-20 से 2024-25 के बीच पार्टी को 56,238 दानदाताओं से कथित तौर पर 1,143.85 करोड़ रुपये से अधिक मिले। आयकर विभाग ने करीब 343 करोड़ रुपये के कथित टैक्स नुकसान का अनुमान लगाया है।
एसएपी मामले में लगभग 519 करोड़ रुपये के कथित दान और करीब 155 करोड़ रुपये के टैक्स नुकसान की बात कही गई है। जीकेपी पर करीब 206.76 करोड़ रुपये लेने और 62.02 करोड़ रुपये के कथित टैक्स नुकसान का आरोप है। एसआरपी से जुड़ा मामला लगभग 415 करोड़ रुपये का है और इसमें करीब 124 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है।
बीएनजेडी मामले में कुछ रकम जेई ट्रेडिंग, काजल एंटरप्राइजेज और परमार एसोसिएट्स जैसी संस्थाओं को भेजे जाने का आरोप है। जांच जारी है और इन आरोपों की पुष्टि अभी अदालत में नहीं हुई है।
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