सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस विधायक और छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को कथित शराब घोटाले से जुड़े दो मामलों में अंतरिम जमानत दे दी है। यह राहत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और राज्य पुलिस द्वारा दर्ज अलग-अलग मामलों में दी गई है। यह आदेश मंगलवार (3 फरवरी 2026) को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने पारित किया।
अदालत ने अंतरिम जमानत देते हुए इस तथ्य को ध्यान में रखा कि कवासी लखमा पिछले वर्ष 15 जनवरी से जेल में बंद हैं। उन्हें ईडी ने धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के आरोपों में गिरफ्तार किया था। इसके अलावा, 2 अप्रैल 2025 को राज्य पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) के तहत गठित भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने भी उन्हें गिरफ्तार किया था।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी माना कि मामले की जांच अभी जारी है और इसमें सैकड़ों गवाह हो सकते हैं। साथ ही, अब तक इस मामले में ट्रायल भी शुरू नहीं हुआ है। इन परिस्थितियों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत देना उचित समझा।
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हालांकि, अदालत ने जमानत के साथ कड़ी शर्तें भी लगाई हैं। कोर्ट ने निर्देश दिया कि कवासी लखमा को छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रहना होगा और ट्रायल की सभी तारीखों पर संबंधित अदालत में उपस्थित होना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, उन्हें अपना पासपोर्ट ट्रायल कोर्ट में जमा करना होगा और किसी भी गवाह को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करनी होगी।
अदालत ने यह भी आदेश दिया कि कवासी लखमा को जांच एजेंसियों के साथ अपना मोबाइल नंबर और वर्तमान ठिकाने की जानकारी साझा करनी होगी ताकि जांच प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।
ईडी के अनुसार, छत्तीसगढ़ में यह कथित शराब घोटाला वर्ष 2019 से 2022 के बीच भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में अंजाम दिया गया। एजेंसी का दावा है कि इस घोटाले से राज्य के खजाने को भारी नुकसान हुआ। ईडी ने पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे चैतन्य बघेल पर भी आरोप लगाया है कि वे इस कथित घोटाले के मुख्य सूत्रधार थे और इससे उत्पन्न करीब 1,000 करोड़ रुपये की राशि को संभाल रहे थे।
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