सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार की उस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई, जिसमें 2023 के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियमों में किए गए संशोधनों को रद्द करने वाले बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है। हालांकि शीर्ष अदालत ने फिलहाल हाईकोर्ट के 2024 के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसमें संशोधित नियमों को “असंवैधानिक” करार दिया गया था।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति आर. महादेवन और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची भी शामिल थे, ने इस मामले में मूल याचिकाकर्ताओं को नोटिस जारी किया। इन याचिकाकर्ताओं में स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैगजीन शामिल हैं।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि इस पूरे मुद्दे का अंतिम रूप से समाधान होना बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जिस तरह काम कर रहे हैं, उससे संस्थानों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए स्पष्ट और संतुलित दिशानिर्देशों की आवश्यकता है।
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केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी सामग्री को पूरी तरह रोकना नहीं था, बल्कि सोशल मीडिया पर सरकार से जुड़ी भ्रामक और गलत जानकारी को नियंत्रित करने के लिए एक व्यवस्था बनाना था।
गौरतलब है कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने 26 सितंबर 2024 को सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम 2021 में किए गए 2023 के संशोधनों को रद्द कर दिया था। इन नियमों के तहत फैक्ट चेक यूनिट (एफसीयू) को सोशल मीडिया पर सरकार से संबंधित कथित फर्जी या भ्रामक पोस्ट की पहचान करने का अधिकार दिया गया था।
यदि किसी पोस्ट को फर्जी बताया जाता, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को उसे हटाना या उस पर चेतावनी जारी करना अनिवार्य था, अन्यथा उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता था।
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