पश्चिम बंगाल सरकार की अन्नपूर्णा भंडार योजना के तहत महिलाओं को दी जा रही आर्थिक सहायता को लेकर राज्य में राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। योजना के लाभार्थियों को राशि मिलने के मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया है।
तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार, 24 अगस्त 2026 को बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव से पहले पार्टी ने लाभ पाने की पात्रता को लेकर कोई सवाल नहीं उठाया था। अब चुनाव के बाद बीजेपी यह तय करने की कोशिश कर रही है कि योजना का लाभ किसे मिलना चाहिए।
ममता बनर्जी ने सवाल उठाया कि आखिर कई महिलाओं को अन्नपूर्णा योजना के तहत पैसा क्यों नहीं मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं को जाति और धर्म के आधार पर योजना का लाभ दिया जा रहा है।
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ममता ने कहा कि चुनाव से पहले बीजेपी ने पात्र लाभार्थियों को मिलने वाली आर्थिक सहायता के मुद्दे पर चर्चा नहीं की थी। उन्होंने सवाल किया कि अब बीजेपी को यह तय करने का अधिकार किसने दिया कि कौन महिला योजना के लिए पात्र है और कौन नहीं।
अन्नपूर्णा भंडार योजना के तहत महिलाओं को आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है। सरकार की ओर से इसे महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण और परिवारों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने वाली योजना के रूप में पेश किया गया है।
हालांकि, योजना के तहत राशि के वितरण को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि कई पात्र महिलाओं को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है।
वहीं, ममता बनर्जी के आरोपों के बीच सुवेंदु अधिकारी और बीजेपी की ओर से योजना को लेकर अलग रुख सामने आया है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में अन्नपूर्णा भंडार योजना अब एक महत्वपूर्ण चुनावी और सामाजिक मुद्दा बनती दिखाई दे रही है।
ममता बनर्जी ने बीजेपी पर राजनीतिक लाभ के लिए महिला कल्याण योजना को लेकर सवाल उठाने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, योजना के लाभ के वितरण और पात्रता को लेकर उठ रहे सवालों ने राज्य सरकार के सामने भी जवाबदेही की चुनौती खड़ी कर दी है।
आने वाले दिनों में अन्नपूर्णा भंडार योजना को लेकर तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच सियासी टकराव और बढ़ने की संभावना है।
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