पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे विवाद के बीच कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को बड़ा आदेश दिया। अदालत ने कहा कि बागी तृणमूल कांग्रेस विधायक रितब्रत बनर्जी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद पर फिलहाल बने रहेंगे। उनकी नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर एकल पीठ को दो महीने के भीतर फैसला करना होगा।
न्यायमूर्ति शंपा सरकार और न्यायमूर्ति अजय कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने यह निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी गुट के विधायक शोभनदेब चट्टोपाध्याय द्वारा विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर एकल पीठ सुनवाई करेगी और निर्धारित समय में मामले का निपटारा करेगी।
इससे पहले 18 जून को हाईकोर्ट की एकल पीठ ने विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस द्वारा रितब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष नियुक्त किए जाने के मामले में अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने खंडपीठ का रुख किया और अपनी दावेदारी खारिज किए जाने तथा रितब्रत बनर्जी की नियुक्ति को चुनौती दी।
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रितब्रत को मिली जान से मारने की धमकी
इस बीच, रितब्रत बनर्जी ने पिछले सप्ताह पुलिस से संपर्क कर आरोप लगाया था कि उन्हें करीब तीन महीने से बांग्लादेश के फोन नंबरों से लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। उनके करीबी लोगों के मुताबिक, 3 मई से 9 अगस्त के बीच उन्हें व्हाट्सऐप कॉल के जरिए धमकियां दी गईं।
कॉल करने वालों ने कथित तौर पर उन्हें बांग्लादेशी-अमेरिकी ब्लॉगर अविजित रॉय जैसा अंजाम भुगतने की धमकी दी थी। लगातार धमकियां मिलने के बाद रितब्रत ने राज्य पुलिस मुख्यालय भवानी भवन में शिकायत की।
रितब्रत बनर्जी इस साल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी में उभरे विद्रोही गुट का प्रमुख चेहरा हैं। यह गुट ममता बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए खुद को ‘असली’ तृणमूल कांग्रेस बताता है। हाईकोर्ट के आदेश से फिलहाल रितब्रत का नेता प्रतिपक्ष पद बरकरार रहेगा।
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