तेलंगाना बीजेपी ने हैदराबाद स्थित नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ में उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन से सवाल किया है। बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता और मीडिया प्रभारी एन.वी. सुभाष ने कहा कि कैंपस में ऐसे व्यक्ति से जुड़ी डॉक्यूमेंट्री दिखाया जाना चिंता का विषय है, जो 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के कथित बड़े षड्यंत्र से जुड़े मामले में यूएपीए के तहत आरोपी हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, ‘प्रिजनर नंबर 626710 इज प्रेजेंट’ नामक डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग बुधवार शाम नालसार कैंपस में छात्रों के एक समूह ने स्वतंत्र रूप से आयोजित की थी। कार्यक्रम निजी था और इसमें केवल छात्रों के शामिल होने की बात सामने आई है। डॉक्यूमेंट्री का निर्देशन फिल्म निर्माता ललित वचानी ने किया है।
नालसार के कुलपति प्रोफेसर श्रीकृष्ण देवा राव ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस स्क्रीनिंग को अधिकृत नहीं किया था। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की किसी भी प्राधिकरण की ओर से कार्यक्रम के लिए आधिकारिक अनुमति नहीं दी गई थी।
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यह स्क्रीनिंग ऐसे समय हुई है जब इसी डॉक्यूमेंट्री की प्रस्तावित स्क्रीनिंग को हैदराबाद के इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और बेंगलुरु की नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी में रद्द या स्थगित किया गया था। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने कहा था कि बिना प्रमाणित फिल्म की सार्वजनिक स्क्रीनिंग के लिए संबंधित कानून के तहत विशेष छूट जरूरी है।
उमर खालिद को सितंबर 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े कथित बड़े षड्यंत्र के मामले में यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया गया था। मामले में आरोप अदालत के समक्ष विचाराधीन हैं और किसी आरोप को दोषसिद्धि के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
बीजेपी ने स्क्रीनिंग को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन से स्पष्टीकरण की मांग की है। वहीं, छात्रों द्वारा आयोजित कार्यक्रम और विश्वविद्यालय की आधिकारिक अनुमति के बीच अंतर को नालसार प्रशासन ने स्पष्ट किया है।
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