थाईलैंड के राजा महा वजीरालोंगकोर्न की सबसे बड़ी पुत्री राजकुमारी बज्रकितियाभा नरेंद्र देब्यावती का 47 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह पिछले तीन वर्षों से कोमा में थीं। राजमहल की ओर से जारी बयान के अनुसार उनका निधन बैंकॉक के एक अस्पताल में हुआ, जहां दिसंबर 2022 से उनका इलाज चल रहा था।
दिसंबर 2022 में राजकुमारी अपने पालतू कुत्तों के साथ व्यायाम कर रही थीं, तभी वह अचानक बेहोश होकर गिर पड़ी थीं। चिकित्सकों ने बाद में बताया कि उनके हृदय में माइकोप्लाज्मा संक्रमण के कारण गंभीर रूप से अनियमित धड़कन उत्पन्न हुई, जिसके चलते वह कोमा में चली गईं। गहन चिकित्सा और निरंतर उपचार के बावजूद उन्हें कभी होश नहीं आया।
राजमहल के बयान में कहा गया कि चिकित्सा दल ने उन्हें सर्वोत्तम और अत्यंत गहन उपचार उपलब्ध कराया, लेकिन समय के साथ उनकी स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई।
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“लॉयर प्रिंसेस” के नाम से प्रसिद्ध बज्रकितियाभा ने अमेरिका के कॉर्नेल विश्वविद्यालय से कानून में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की थी। वह थाईलैंड में एक योग्य बैरिस्टर भी थीं। उन्होंने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में थाई मिशन में कार्य किया और बाद में थाईलैंड के अटॉर्नी जनरल कार्यालय में सेवाएं दीं। वर्ष 2012 से 2014 तक वह ऑस्ट्रिया में थाईलैंड की राजदूत भी रहीं।
राजकुमारी महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की प्रबल समर्थक थीं। उन्होंने जेलों में बंद महिलाओं और बच्चों के पुनर्वास के लिए “कमलंगजाई” परियोजना शुरू की थी। उनके प्रयासों से संयुक्त राष्ट्र महासभा ने महिला कैदियों के जीवन में सुधार के लिए “बैंकॉक नियम” अपनाए थे।
उनके निधन के बाद थाईलैंड के शाही उत्तराधिकार को लेकर भी नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं, क्योंकि उन्हें भविष्य के संभावित नेतृत्वकर्ताओं में से एक माना जाता था।
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