पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने अपने दो विधायकों संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब 2026 के विधानसभा चुनावों के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।
टीएमसी द्वारा जारी बयान में कहा गया कि दोनों विधायक रविवार को पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी द्वारा कोलकाता स्थित कालीघाट आवास पर बुलाई गई महत्वपूर्ण बैठक में अनुपस्थित रहे। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि दोनों नेताओं ने ऐसे बयान दिए जो तृणमूल कांग्रेस के हितों के प्रतिकूल थे।
पार्टी के आधिकारिक नोटिस में कहा गया, “मामले पर गंभीरता से विचार करने के बाद अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के सक्षम प्राधिकारी ने आपको पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से निष्कासित करने का निर्णय लिया है।” इसके साथ ही दोनों नेताओं से पार्टी से जुड़ी सभी जिम्मेदारियां, पद और विशेषाधिकार वापस ले लिए गए हैं।
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ऋतब्रत बनर्जी, जो पहले राज्यसभा सांसद रह चुके हैं, वर्ष 2017 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) छोड़कर टीएमसी में शामिल हुए थे। उन्होंने उलूबेरिया पूर्व विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर भाजपा उम्मीदवार रुद्र प्रसाद बनर्जी को 11,800 से अधिक मतों से हराया था।
वहीं, एंटाली से विधायक संदीपन साहा पूर्व टीएमसी विधायक स्वर्ण कमल साहा के पुत्र हैं। हालिया विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा की प्रियंका टिबरेवाल को 34,000 से अधिक मतों के अंतर से पराजित किया था।
संदीपन साहा ने बैठक में अनुपस्थित रहने के अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि बैठक उचित प्रक्रियाओं का पालन किए बिना बुलाई गई थी। उन्होंने टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी से कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले को लेकर भी सवाल पूछे थे।
रविवार को आयोजित बैठक में 80 में से केवल 20 विधायक ही पहुंचे थे। पार्टी ने कम उपस्थिति के लिए पिछले सप्ताह सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले को जिम्मेदार बताया था। बाद में ममता बनर्जी ने उपस्थित विधायकों के साथ अनौपचारिक चर्चा भी की।
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