मुंबई के बाहरी इलाके पालघर तक अपनी मांगों को लेकर निकाले गए आदिवासियों के लंबे मार्च को सरकार द्वारा मांगें स्वीकार किए जाने के बाद स्थगित कर दिया गया। चार दिन पहले 30,000 से अधिक आदिवासी वन अधिकार अधिनियम (FRA) के समुचित क्रियान्वयन, जल जीवन मिशन में हो रही अत्यधिक देरी सहित अन्य मुद्दों को लेकर लगभग 55 किलोमीटर की पदयात्रा पर निकले थे। यह आंदोलन गुरुवार (22 जनवरी 2026) को समाप्त कर दिया गया।
ऑल इंडिया किसान सभा के अध्यक्ष और सीपीआई(एम) के पोलित ब्यूरो सदस्य अशोक धवले ने बताया कि प्रशासन के साथ हुई बातचीत सकारात्मक रही। उन्होंने कहा, “हमारी सभी प्रमुख स्थानीय मांगों को स्वीकार कर लिया गया है। राज्य स्तर की मांगों पर भी प्रशासन ने समयबद्ध आश्वासन दिया है। बुधवार (21 जनवरी 2026) को संबंधित अधिकारियों के साथ सात घंटे से अधिक समय तक मैराथन बैठकें हुईं।” उन्होंने बताया कि जिला कलेक्टर द्वारा लिखित आश्वासन दिए जाने के बाद घेराव और मार्च को स्थगित करने का निर्णय लिया गया।
आदिवासी समुदाय की प्रमुख मांगों में वन अधिकार अधिनियम का प्रभावी कार्यान्वयन, जल जीवन मिशन के तहत लंबित योजनाओं को जल्द पूरा करना, भूमि अधिकारों से जुड़े मामलों का निपटारा और बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता शामिल थी। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इन मुद्दों को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा था, जिसके चलते उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
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पालघर की जिला कलेक्टर डॉ. इंदु रानी जाखड़ ने बताया कि प्रशासन ने प्रतिनिधिमंडल द्वारा उठाई गई सभी चिंताओं की समीक्षा की है। उन्होंने कहा, “इन शिकायतों और समस्याओं के समाधान के लिए एक समिति गठित की गई है, जिसमें प्रदर्शनकारी प्रतिनिधिमंडल के पांच सदस्य भी शामिल होंगे।”
प्रशासन के इस कदम को आंदोलनकारियों ने सकारात्मक संकेत बताया है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि तय समय सीमा में वादों को पूरा नहीं किया गया, तो वे दोबारा आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे।
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