अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने डेनमार्क के साथ ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने को लेकर समझौता किया है। यह घोषणा ऐसे समय हुई है, जब ट्रंप कई महीनों से ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण को लेकर दबाव बनाते रहे हैं।
ट्रंप ने कहा कि समझौते के तहत अमेरिका को ग्रीनलैंड की सुरक्षा और अन्य आवश्यकताओं पर स्थायी नियंत्रण मिलेगा। उन्होंने दावा किया कि इससे अमेरिका की सभी प्रमुख चिंताओं का समाधान हो जाएगा। हालांकि, वॉशिंगटन स्थित डेनिश दूतावास ने तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की।
ट्रंप ने कहा कि समझौते के बाद उनका प्रशासन ग्रीनलैंड में बड़े अमेरिकी सैन्य ठिकाने और मौजूदगी विकसित करने की प्रक्रिया “तुरंत” शुरू करेगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि इसके लिए अमेरिका को कोई खर्च नहीं करना पड़ेगा।
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ट्रंप के अनुसार, समझौते के तहत किसी भी अमेरिकी प्रतिद्वंद्वी को ग्रीनलैंड में सैन्य अड्डा स्थापित करने, सैन्य मौजूदगी रखने या संवेदनशील निवेश करने की अनुमति नहीं होगी, जब तक कि अमेरिका इसकी लिखित मंजूरी न दे।
उन्होंने समझौते को “अनंत अवधि” वाला करार बताया और कहा कि अमेरिका ग्रीनलैंड के उपयुक्त हिस्सों में बड़ी सैन्य मौजूदगी विकसित करेगा। इसके निर्माण और विकास में ग्रीनलैंड के लोगों के साथ काम करने की बात भी उन्होंने कही।
इस बीच, डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन के कार्यालय ने कहा कि अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड की तीनों सरकारें अगले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान समझौते पर हस्ताक्षर करेंगी। हालांकि, इसे लागू करने के लिए डेनमार्क और ग्रीनलैंड की संसदों की मंजूरी जरूरी होगी।
फ्रेडरिक्सन ने कहा कि समझौता ग्रीनलैंड और डेनमार्क की संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता को मान्यता देता है और दोनों के आत्मनिर्णय के अधिकार को बरकरार रखता है।
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