अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो सहयोगी देशों पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि ईरान के खिलाफ मध्य पूर्व में चल रहे अभियान में उन्होंने अमेरिका का कोई साथ नहीं दिया। ट्रंप ने स्पष्ट कहा कि उन्हें नाटो से किसी मदद की जरूरत नहीं है, लेकिन सहयोगियों का यह रवैया “कभी नहीं भुलाया जाएगा।”
ट्रंप के इस बयान के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या अमेरिका भविष्य में नाटो (NATO) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर पुनर्विचार कर सकता है। हाल के हफ्तों में ट्रंप लगातार अपने सहयोगी देशों की आलोचना कर रहे हैं। उन्होंने नाटो देशों को “कायर” तक कह दिया और कहा कि उन्होंने अमेरिका और इज़राइल का समर्थन नहीं किया।
ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि जब अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर रहा है, तब नाटो देश दूर खड़े हैं, लेकिन तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंता जता रहे हैं। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने जैसे कदम से तेल कीमतों को नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन सहयोगी देश इस दिशा में कोई प्रयास नहीं कर रहे हैं।
और पढ़ें: डोनाल्ड ट्रंप का दावा: ईरान से अमेरिका और मध्य पूर्व को विशाल खतरा, परमाणु मंसूबे कुचलने की कसम
इस बीच, रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ईरान के खिलाफ कड़े सैन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहा है। इनमें ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमले, खार्ग द्वीप पर नियंत्रण और परमाणु ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शामिल हैं।
ट्रंप के इन बयानों और संभावित सैन्य रणनीतियों ने वैश्विक राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है, जिससे आने वाले समय में अमेरिका और उसके सहयोगियों के रिश्तों पर असर पड़ सकता है।
और पढ़ें: ईरान युद्ध के बीच ट्रंप का बड़ा बयान: नाटो की जरूरत नहीं, अमेरिका अकेले सक्षम