अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल और गैस की खरीद पर लगाए गए प्रतिबंधों तथा शुल्कों में छूट देने का फैसला किया है। इससे भारत, चीन और अन्य देशों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। ट्रंप ने अपने फैसले के पीछे अमेरिका के राष्ट्रीय हितों का हवाला दिया है। उन्होंने शुक्रवार शाम स्थानीय समय के अनुसार यह छूट जारी की, जबकि संबंधित प्रतिबंध अगले दिन से प्रभावी होने वाले थे। ट्रंप ने बताया कि उन्होंने इस फैसले के संबंध में अमेरिकी कांग्रेस को प्रमाणपत्र भी सौंपा है।
रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाला कानून
लिंडसे ओ. ग्राहम के नाम पर बने ‘सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट’ के तहत ट्रंप को रूस पर व्यापक प्रतिबंध लगाने और रूसी तेल-गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार दिया गया था। ग्राहम यूक्रेन के प्रबल समर्थक थे और रूस को आर्थिक मदद देने वाले देशों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की वकालत करते रहे थे।
ट्रंप पहले भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने की आलोचना कर चुके हैं और भारत से इसे बंद करने की मांग भी कर चुके हैं। हालांकि, भारत ने अपने रुख पर कायम रहते हुए स्पष्ट किया था कि वह अपने आर्थिक हितों और नागरिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।
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रूस के साथ तेल समझौते पर भी यू-टर्न
हाल ही में ट्रंप ने रूस के साथ डीजल आपूर्ति को लेकर समझौते की घोषणा की थी। इसके तहत रूस अमेरिका और वैश्विक बाजार में 3 लाख टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करेगा। इसके अलावा नवंबर में 5 लाख टन और उसके बाद 10 लाख टन डीजल देने की बात कही गई थी।
जेलेंस्की ने जताई नाराजगी
ट्रंप के इस कदम की यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने आलोचना की थी। उन्होंने इसे युद्ध में निवेश बताते हुए रूस के साथ तनाव कम करने की वास्तविक पहल की मांग की थी।
ट्रंप ने जेलेंस्की से रूस की तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने को कहा है। हालांकि, हमले जारी रहने से दोनों देशों के बीच मतभेद बढ़े हैं। अब देखना होगा कि रूसी तेल खरीद पर प्रतिबंधों में नई छूट को लेकर यूक्रेन क्या प्रतिक्रिया देता है।
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