पश्चिम एशिया में जारी तनाव और गाज़ा के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ योजना के बीच भारत सोमवार (19 जनवरी, 2026) को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की मेजबानी करेगा। इस दौरे को विशेष महत्व इसलिए भी मिल रहा है क्योंकि यह यात्रा यूएई द्वारा राष्ट्रपति ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की घोषणा का स्वागत किए जाने के दो दिन बाद शुरू हो रही है, जिसमें भारत को भी शामिल होने का निमंत्रण मिला है।
विदेश मंत्रालय (एमईए) ने रविवार (18 जनवरी) को जानकारी देते हुए बताया कि यूएई राष्ट्रपति के इस आधिकारिक दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी औपचारिक वार्ता होगी। इस बैठक में भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के साथ-साथ नए सहयोग क्षेत्रों की पहचान पर चर्चा की जाएगी।
रिपोर्ट के अनुसार, “यह दौरा दोनों नेताओं को भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी के लिए नई दिशाएं तय करने का अवसर प्रदान करेगा। इसके साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान भी होगा, जिन पर भारत और यूएई के दृष्टिकोण में काफी समानता है।”
और पढ़ें: गाज़ा के लिए ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस में भारत को न्योता
गौरतलब है कि गाज़ा में शासन व्यवस्था के पुनर्गठन और स्थायी शांति की दिशा में ट्रंप प्रशासन द्वारा प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ योजना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है। इस पृष्ठभूमि में यूएई राष्ट्रपति का भारत दौरा न केवल द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से अहम है, बल्कि पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और पुनर्निर्माण प्रयासों में भारत की संभावित भूमिका को भी रेखांकित करता है।
भारत और यूएई के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, निवेश और लोगों से लोगों के संपर्क जैसे क्षेत्रों में पहले से मजबूत सहयोग है। यह दौरा इन संबंधों को और गहराई देने तथा बदलते वैश्विक परिदृश्य में साझा रणनीति पर सहमति बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
और पढ़ें: पाकिस्तान: कराची के शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में भीषण आग, 6 की मौत, 38 लापता