केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार, 1 फरवरी 2026 को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपना लगातार नौवां केंद्रीय बजट पेश किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में भारत को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने के उद्देश्य से ‘बायोफार्मा शक्ति’ योजना की घोषणा की। इस महत्वाकांक्षी पहल के लिए अगले पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत में बीमारियों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और अब गैर-संचारी रोग जैसे मधुमेह, कैंसर और ऑटो-इम्यून बीमारियों का बोझ बढ़ रहा है। ऐसे में जैविक दवाएं (बायोलॉजिकल मेडिसिन) लंबी उम्र और बेहतर जीवन गुणवत्ता सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाती हैं, वह भी किफायती लागत पर।
निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा, “भारत को वैश्विक बायो-फार्मा मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित करने के लिए मैं ‘बायोफार्मा शक्ति’ का प्रस्ताव रखती हूं, जिसके तहत अगले पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।” उन्होंने बताया कि यह पहल बायोफार्मा, बायोटेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर रिसर्च, इनोवेशन और लाइफ साइंसेज इकोसिस्टम को मजबूती प्रदान करेगी।
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इस योजना के तहत देशभर में 1,000 मान्यता प्राप्त क्लिनिकल ट्रायल साइट्स का नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जिससे दवाओं और उपचार पद्धतियों के परीक्षण की क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। इसके साथ ही सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) को और सशक्त किया जाएगा, ताकि वह वैश्विक मानकों के अनुरूप कार्य कर सके।
वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि दवाओं की मंजूरी की प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए वैज्ञानिक समीक्षा और विशेषज्ञों के माध्यम से समयबद्ध स्वीकृति प्रणाली विकसित की जाएगी। सरकार का मानना है कि ‘बायोफार्मा शक्ति’ भारत को स्वास्थ्य नवाचार और अनुसंधान के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।
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