केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ किसी भी तरह के मुद्दों या चल रही व्यापार वार्ताओं का केंद्रीय बजट 2026 की प्रक्रिया पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। उन्होंने कहा कि बजट तैयार करते समय या कई प्रमुख वस्तुओं पर सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) में कटौती का निर्णय लेते समय अमेरिका से जुड़े मामलों को ध्यान में नहीं रखा गया।
सोमवार (2 फरवरी, 2026) को यह बयान देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि बजट निर्माण पूरी तरह से देश की आंतरिक आर्थिक प्राथमिकताओं, उद्योगों की जरूरतों और आम नागरिकों के हितों को ध्यान में रखकर किया गया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कस्टम ड्यूटी में कटौती का उद्देश्य घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना, महंगाई पर नियंत्रण रखना और उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत करना है, न कि किसी विदेशी दबाव के चलते निर्णय लेना।
वित्त मंत्री ने यह टिप्पणी संसद में सोलहवें वित्त आयोग (16th Finance Commission) की रिपोर्ट पेश करने के एक दिन बाद की। इस दौरान उन्होंने केंद्र और राज्यों के वित्तीय संबंधों पर भी बात की। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने राज्यों के साथ सेस (Cess) की हिस्सेदारी को लेकर भी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
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निर्मला सीतारमण ने कहा कि स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा सेस से प्राप्त राशि का उपयोग सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे विषयों पर किया जा रहा है, जो संविधान के अनुसार राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। यह कदम इस बात का संकेत है कि केंद्र सरकार राज्यों की जिम्मेदारियों को समझते हुए सहयोगात्मक संघवाद (Cooperative Federalism) की दिशा में आगे बढ़ रही है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आमतौर पर सेस से प्राप्त धन केंद्र सरकार के विशेष अधिकार क्षेत्र में होता है, लेकिन अब इसे राज्यों से जुड़े विषयों पर खर्च किया जा रहा है। इससे राज्यों को वित्तीय रूप से मजबूती मिलेगी और केंद्र-राज्य संबंधों में संतुलन स्थापित होगा।
वित्त मंत्री के इस बयान को ऐसे समय में अहम माना जा रहा है, जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही है और कस्टम ड्यूटी में कटौती को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं।
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