अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच शांति वार्ता का अगला दौर अनिश्चितता में पड़ गया है। तेहरान के सख्त रुख और वॉशिंगटन के विरोधाभासी बयानों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। दोनों देशों के बीच 14 दिनों का युद्धविराम बुधवार को समाप्त होने वाला है, लेकिन इसके भविष्य पर अब सवाल खड़े हो गए हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह पाकिस्तान के इस्लामाबाद में आगे की बातचीत के लिए जेडी वेंस के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल भेजने की योजना बना रहे हैं। हालांकि, ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह तब तक वार्ता में हिस्सा नहीं लेगा, जब तक अमेरिका अपने रुख में नरमी नहीं लाता।
ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि कोई समझौता नहीं हुआ तो गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जिनमें सैन्य टकराव भी शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि युद्धविराम को बढ़ाए जाने की संभावना बेहद कम है।
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वहीं, ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कालीबाफ ने अमेरिका की नीति की आलोचना करते हुए कहा कि दबाव में कोई बातचीत स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि ईरान धमकियों के साए में वार्ता नहीं करेगा और जरूरत पड़ने पर नई रणनीतियों के साथ जवाब देने को तैयार है।
इससे पहले ट्रंप ने कहा कि प्रस्तावित वार्ता का उद्देश्य केवल अस्थायी युद्धविराम नहीं, बल्कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करना है। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि समझौता होने तक ईरानी बंदरगाहों पर प्रतिबंध जारी रहेंगे।
इसी बीच, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से बातचीत कर हालात पर चर्चा की। इससे पहले 11 और 12 अप्रैल को इस्लामाबाद में हुई वार्ता बेनतीजा रही थी, जिससे भविष्य की बातचीत पर अनिश्चितता बनी हुई है।
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