मध्य पूर्व में अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच जारी युद्ध लगातार छठे दिन भी तेज होता जा रहा है। इस संघर्ष में अब तक भारी जनहानि हुई है और हालात सामान्य होने के कोई संकेत फिलहाल दिखाई नहीं दे रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका और इज़राइल के हमलों में ईरान में पांच दिनों के भीतर 1,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं लेबनान में करीब 60 लोगों की जान गई है, जबकि इज़राइल में लगभग एक दर्जन लोग मारे गए हैं। इस संघर्ष में छह अमेरिकी सैनिकों के भी मारे जाने की खबर है।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार युद्ध के पहले दो दिनों में ही ईरान की राजधानी तेहरान से लगभग 1 लाख लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर चुके हैं।
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ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि मौजूदा हालात में बातचीत की कोई वजह नहीं है। उन्होंने अमेरिकी सेना द्वारा एक जहाज पर किए गए हमले को “युद्ध अपराध” करार दिया। उन्होंने इराक-कुर्द क्षेत्र के एक नेता से बातचीत में ईरान-इराक सीमा पर संभावित “आतंकी गतिविधियों” की भी चेतावनी दी।
इस बीच समुद्र में भी संघर्ष तेज हो गया है। अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने दावा किया कि अमेरिकी पनडुब्बी ने अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में ईरान के एक युद्धपोत को डुबो दिया।
इज़राइल ने लेबनान में ईरान समर्थित संगठन हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर नए हवाई हमले किए, जिनमें राजधानी बेरूत के आसपास के इलाके भी शामिल हैं। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी और इज़राइली ठिकानों पर हमले किए और बहरीन, कुवैत तथा इज़राइल को निशाना बनाया।
इस युद्ध का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने लगा है। ईरान के हमलों से होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल आपूर्ति प्रभावित होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं। ऊर्जा लागत बढ़ने की आशंका से दुनिया भर के शेयर बाजारों में भी अस्थिरता देखी जा रही है।
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