संयुक्त राज्य अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए व्यापक वैश्विक टैरिफ को रद्द कर दिया। यह फैसला ट्रम्प की आर्थिक नीतियों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। अदालत ने कहा कि 1977 के आपातकालीन शक्तियों संबंधी कानून का उपयोग कर आयात शुल्क लगाना कानून की मूल भावना से परे था।
ट्रम्प प्रशासन ने अप्रैल 2025 में “पारस्परिक टैरिफ” लागू किए थे, जिनका उद्देश्य व्यापार घाटे को आपात स्थिति बताते हुए लगभग सभी व्यापारिक साझेदार देशों पर शुल्क लगाना था। अदालत के बहुमत ने माना कि इस कानून के तहत आयात कर लगाने का स्पष्ट प्रावधान नहीं था। हालांकि न्यायाधीश सैमुअल एलिटो, क्लेरेंस थॉमस और ब्रेट कैवनॉ ने असहमति जताते हुए कार्यपालिका को अधिक लचीलापन देने की वकालत की।
ट्रम्प ने इस मामले को अमेरिकी इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण मामलों में से एक बताया था और चेतावनी दी थी कि यदि टैरिफ रद्द हुए तो आर्थिक संकट आ सकता है। लेकिन इस फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं को डेमोक्रेटिक राज्यों, उदारवादी समूहों और कुछ व्यापार समर्थक संगठनों का समर्थन मिला।
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अमेरिकी संविधान के अनुसार टैरिफ लगाने का अधिकार कांग्रेस के पास है। विभिन्न व्यवसायिक समूहों ने भी अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जिनका कहना था कि इस कानून के तहत आयात शुल्क लगाना असंवैधानिक है।
कांग्रेसनल बजट ऑफिस के अनुसार इन टैरिफ का 10 वर्षों में लगभग 3 ट्रिलियन डॉलर का प्रभाव पड़ सकता था। यह फैसला ट्रम्प की व्यापार नीति और कार्यकारी शक्तियों पर न्यायिक नियंत्रण के रूप में देखा जा रहा है।
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