भारत में लग्जरी हाउसिंग की परिभाषा तेजी से बदल रही है। एक समय था जब आलीशान विला, बड़े लॉन, कम ऊंचाई वाली कॉलोनियां और विशाल भूखंड ही शाही जीवनशैली के प्रतीक माने जाते थे। लेकिन अब महानगरों में जमीन की कमी और तेजी से विकसित होते शहरी ढांचे के कारण लग्जरी जीवन का स्वरूप बदल रहा है।
आज के संपन्न खरीदार केवल बड़े घर नहीं, बल्कि बेहतर कनेक्टिविटी, आधुनिक सुविधाएं, सुरक्षा, वेलनेस और उच्च गुणवत्ता वाली जीवनशैली की तलाश कर रहे हैं। इसी वजह से प्रीमियम हाई-राइज प्रोजेक्ट्स और वर्टिकल कम्युनिटीज तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं।
दिल्ली-एनसीआर, खासकर गुरुग्राम, इस बदलाव का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। गोल्फ कोर्स रोड, द्वारका एक्सप्रेसवे और साइबर हब जैसे इलाके आधुनिक लग्जरी जीवनशैली के प्रतीक बन गए हैं। रियल एस्टेट सलाहकार कंपनी जेएलएल के अनुसार, वर्ष 2026 की पहली तिमाही में दिल्ली-एनसीआर में 10,740 आवासीय फ्लैट बिके, जिनमें 53 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले गुरुग्राम की रही।
और पढ़ें: सुवेंदु सरकार के 30 दिन: बड़े फैसलों और टीएमसी में बगावत से बदला बंगाल का सियासी परिदृश्य
विशेषज्ञों का मानना है कि अब खरीदार ऐसे स्थानों को प्राथमिकता दे रहे हैं जहां आवास, कार्यालय, होटल, शॉपिंग सेंटर, मनोरंजन और सामाजिक सुविधाएं एक ही क्षेत्र में उपलब्ध हों। इस प्रकार के मिश्रित उपयोग (मिक्स्ड-यूज) वाले इकोसिस्टम लोगों को सुविधाजनक और आधुनिक जीवन प्रदान कर रहे हैं।
अर्जुन गहलोत, निदेशक, एम्बिएंस ग्रुप के अनुसार, गुरुग्राम के एम्बिएंस मॉल, साइबर हब, उद्योग विहार और एनएच-48 कॉरिडोर के आसपास के क्षेत्र अब केवल व्यावसायिक केंद्र नहीं, बल्कि आकर्षक आवासीय गंतव्य बन चुके हैं।
वहीं, सौरभ सहारन, ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर, एचसीबीएस डेवलपमेंट्स लिमिटेड का कहना है कि आज के खरीदार विशाल घरों के साथ-साथ समुदाय, गोपनीयता और बेहतर जीवन अनुभव चाहते हैं। यही कारण है कि द्वारका एक्सप्रेसवे और गोल्फ कोर्स रोड जैसे क्षेत्रों में प्रीमियम आवासीय परियोजनाओं की मांग लगातार बढ़ रही है।
और पढ़ें: TMC में बगावत और कांग्रेस-DMK तनाव के बीच क्या परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक पास करा पाएगा NDA?