यमन में मिले मिसाइल के रहस्यमय मलबे ने सऊदी अरब की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को लेकर नई अटकलों को जन्म दिया है। खुले स्रोतों से जानकारी जुटाने वाले विशेषज्ञों का आकलन है कि यह मलबा चीन में बनी DF-15A कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल के बूस्टर हिस्से का हो सकता है। हालांकि, इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हुई है।
यह संदिग्ध मलबा 14 सितंबर 2026 को यमन के मारिब गवर्नरेट के रघवान जिले में मिला। इससे एक रात पहले हूती ठिकानों पर संदिग्ध सऊदी हवाई हमला हुआ था। सऊदी अरब, चीन या यमनी अधिकारियों ने अब तक यह पुष्टि नहीं की है कि मलबा DF-15A मिसाइल का ही है। इसके अलावा मिसाइल कहां से दागी गई, उसका लक्ष्य क्या था और इसे किस सैन्य इकाई ने संचालित किया, इसकी भी जानकारी सामने नहीं आई है।
DF-15A से क्यों जोड़ा जा रहा मलबा?
विशेषज्ञों ने मलबे की तस्वीरों के आधार पर इसके आकार, बेलनाकार संरचना, जोड़ने वाले हिस्सों और क्षतिग्रस्त नोजल की बनावट का विश्लेषण किया है। उनका मानना है कि ये विशेषताएं DF-15A के बूस्टर से मिलती-जुलती हैं।
और पढ़ें: सऊदी अरब में 11 करोड़ टन यूरेनियम युक्त अयस्क और दुर्लभ खनिज मिले
मलबे को मिसाइल के ठोस ईंधन वाले इस्तेमाल हो चुके मोटर केसिंग का हिस्सा माना जा रहा है। इसमें चीन के किसी कारखाने की स्पष्ट पहचान या सीरियल नंबर नहीं दिख रहा है। इसलिए केवल तस्वीरों के आधार पर इसकी उत्पत्ति निश्चित नहीं की जा सकती।
पहले हूती मिसाइल होने का था शक
शुरुआत में माना गया था कि मलबा हूती विद्रोहियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली बुरकान-3 या जुल्फिकार जैसी मिसाइल का हो सकता है। हालांकि मिसाइल विशेषज्ञों ने इस संभावना पर सवाल उठाए। इसके बाद जांच का ध्यान सऊदी अरब की संभावित भूमिका की ओर गया।
यदि DF-15A की पहचान की पुष्टि होती है, तो यह सऊदी अरब द्वारा बैलिस्टिक मिसाइल के युद्ध में इस्तेमाल का पहला सार्वजनिक प्रमाण हो सकता है। इससे यह भी संकेत मिल सकता है कि रॉयल सऊदी स्ट्रैटेजिक मिसाइल फोर्स के पास सड़क से स्थानांतरित की जा सकने वाली यह प्रणाली मौजूद है।
कई सवाल अभी बाकी
चीन की DF-15, जिसे M-9 भी कहा जाता है, सड़क-गतिशील कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली है। इसकी पुष्टि होने पर सऊदी अरब की सैन्य क्षमताओं और पारंपरिक अभियानों में रणनीतिक मिसाइलों के इस्तेमाल को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठ सकते हैं।
फिलहाल लॉन्चर, संबंधित सऊदी सैन्य इकाई, मिसाइल के वारहेड और सटीक लक्ष्य की कोई सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए केवल मलबे की तस्वीरों के आधार पर मिसाइल के मालिकाना हक या इस्तेमाल को निश्चित मानना जल्दबाजी होगी।
और पढ़ें: सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर हूतियों के हमले का दावा, सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा धुएं का बड़ा गुबार